अब नहीं उजड़ेगी गेहूं की फसल! नीलगाय की दुश्मन यह खेती दिलाएगी डबल फायदा

नीलगाय से परेशान किसानों के लिए कुसुम की खेती असरदार विकल्प बन रही है. कांटेदार पौधा होने से जंगली जानवर फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते. कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाली यह फसल तेल की अच्छी मांग के कारण अतिरिक्त आय का मौका भी देती है.

नोएडा | Updated On: 24 Feb, 2026 | 10:27 PM

Kusum Farming: किसान इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. मेहनत से बोई गई गेहूं और दूसरी फसलें रातों-रात नीलगाय चट कर जाती हैं. खेतों की रखवाली के लिए किसानों को रात भर जागना पड़ता है, ऊपर से बाड़ और तार लगाने में अलग खर्च होता है. कई बार तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. लेकिन झारखंड के कृषि विभाग की ओर से अब इसका एक ऐसा हल सामने आया है, जो फसल की सुरक्षा भी करेगा और कमाई भी बढ़ाएगा. यह हल है-कुसुम की खेती. शुष्क इलाकों में यह फसल किसानों के लिए वरदान बन सकती है.

कुसुम बनेगी प्राकृतिक सुरक्षा कवच

झारखंड कृषि विभाग का कहना है कि कुसुम एक ऐसी फसल है, जिसे नीलगाय और अन्य जंगली जानवर  नुकसान नहीं पहुंचाते. इसके पौधों में छोटे-छोटे कांटे होते हैं, जिससे पशु इसे खाने से बचते हैं. यही वजह है कि इसे खेत की मेड़ पर लगाने से यह प्राकृतिक बाड़ का काम करती है. अगर किसान गेहूं या अन्य फसल के चारों तरफ कुसुम लगा दें, तो नीलगाय खेत में घुसने से बचेगी. इससे फसल सुरक्षित रहेगी और अतिरिक्त बाड़ लगाने का खर्च भी कम होगा. इस तरह कुसुम न सिर्फ सुरक्षा देती है, बल्कि खेत की उपयोगिता भी बढ़ाती है.

कम पानी में भी तैयार, लागत भी कम

कई शुष्क इलाकों में पानी की कमी बड़ी समस्या है. ऐसे में कुसुम की खेती  काफी फायदेमंद मानी जा रही है. रबी सीजन  में इसे बहुत कम पानी में उगाया जा सकता है. अंकुरण के बाद अगर सिंचाई न भी की जाए, तो भी फसल तैयार हो जाती है. हालांकि एक-दो बार पानी देने से उत्पादन 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. कम लागत, कम पानी और कम देखभाल में तैयार होने वाली यह फसल सूखी जमीन के लिए एक बेहतर विकल्प है. अगर किसान इसे एक एकड़ या उससे ज्यादा क्षेत्र में लगाते हैं, तो अच्छी पैदावार के साथ बढ़िया मुनाफा भी कमा सकते हैं.

तेल की भारी मांग, बाजार में अच्छा दाम

कुसुम की सबसे बड़ी खासियत इसका तेल है. इस तेल में अनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है. खासकर हृदय रोगियों के लिए यह अच्छा विकल्प माना जाता है. बाजार में कुसुम के तेल की अच्छी मांग रहती है. यह तेल पारंपरिक सरसों के तेल  से भी महंगा बिकता है. प्रसिद्ध ब्रांड का सफोला तेल भी कुसुम से ही तैयार किया जाता है.

यानी किसान अगर कुसुम की खेती करते हैं, तो उन्हें बाजार की चिंता कम करनी पड़ेगी. मांग अच्छी होने से दाम भी बेहतर मिलते हैं. कुसुम की खेती किसानों के लिए डबल फायदा देने वाली साबित हो सकती है-एक तरफ फसल की सुरक्षा, दूसरी तरफ अतिरिक्त कमाई. खासकर शुष्क भूमि वाले इलाकों  में यह खेती नई उम्मीद बनकर उभर रही है.

Published: 25 Feb, 2026 | 06:45 AM

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