Mustard cultivation: मकर संक्रांति गुजर जाने के बावजूद अभी बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इससे रबी फसल के नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है. लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान का डर सरसों किसानों को सता रहा है. किसानों को डर है कि जनवरी की ठंड सरसों के फूलों के लिए खतरा बन सकती है. लेकिन किसानों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम कुछ ऐसे देसी टिप्स के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, जिसे अपनाते ही ठंड से सरसों की फसल को नुकसान नहीं पहुंचेगा. साथ ही पैदावार भी बढ़ जाएगी.
कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, किसानों को पाला से बचाव के लिए खेत के चारों ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में धुआं करना चाहिए. साथ ही, 0.1 फीसदी गंधक अम्ल का छिड़काव करने से पौधों का अंदरूनी तापमान बढ़ता है और फसल ठंड से सुरक्षित रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों एक तिलहनी फसल है और इसमें तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर बहुत जरूरी है. अंतिम सिंचाई के समय या बाद में छिड़काव के जरिए सल्फर देने से दानों में तेल का प्रतिशत 3- 4 फीसदी तक बढ़ जाता है और दाने सुडौल व चमकदार बनते हैं.
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पैदावार में 25-30 फीसदी तक की कमी आ सकती है
सरसों की फसल में फूल आने के बाद जब फलियां बनने लगें, तब नमी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. जनवरी में जरूरत के मुताबिक हल्की सिंचाई करें, लेकिन इस समय जलभराव से बचें, क्योंकि इससे जड़ें कमजोर हो सकती हैं. सही नमी बनाए रखने से दाना पूरी तरह भरता है और वजन बढ़ता है. इस दौरान चेपा और सफेद रस्ट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यदि पत्तियों या फूलों पर चिपचिपा पदार्थ दिखे, तो विशेषज्ञों की सलाह से इमिडाक्लोप्रिड जैसी कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें. समय पर कीट नियंत्रण न करने पर पैदावार में 25-30 फीसदी तक की कमी आ सकती है.
दानों के लिए एनपीके और बोरॉन का मिश्रण फायदेमंद होता है
अच्छी फलियों और दानों के लिए एनपीके (0:52:34) और बोरॉन का मिश्रण फायदेमंद होता है. बोरॉन न केवल परागण को बढ़ाता है, बल्कि फलियों के फटने को भी रोकता है. इसका इस्तेमाल दानों को मोटा और तेल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि खेत को हमेशा खरपतवार मुक्त रखें, ताकि मुख्य फसल को पर्याप्त पोषण मिल सके. पीली या खराब हो रही निचली पत्तियों को हटा देना चाहिए, जिससे हवा का संचार बेहतर होता है और फफूंद जनित रोगों का खतरा कम होता है. साथ ही, खेत की मेड़ें साफ रखने से कीटों के छिपने की जगह खत्म हो जाती है, जिससे कीट नियंत्रण आसान हो जाता है.