पहली सिंचाई के बाद खाद नहीं दी तो पीली पड़ सकती है गेहूं की फसल, जानिए कैसे बढ़ाएं पैदावार

Wheat Farming Tips: गेहूं किसानों को ज्यादा पैदावार हासिल करने के लिए फसल को सूखने से बचाना जरूरी है. इसके लिए पहली सिंचाई के बाद सही मात्रा में और सटीक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे पौधों का फुटाव अच्छा होता है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है.

नोएडा | Published: 14 Jan, 2026 | 02:43 PM

Wheat Crop Irrigation: गेहूं की पहली सिंचाई के बाद अगर समय पर खाद और पोषक तत्व फसल को नहीं दिए गए तो पौधे  आने लगता है और उत्पादन प्रभावित होता है.इसलिए पहली सिंचाई के बाद यूरिया और जिंक सल्फेट का उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे फुटाव अच्छा हो और उत्पादन भी बढ़ सके.

ठंड के मौसम में रबी फसलों की बुवाई की जाती है. उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में गेहूं प्रमुख रबी फसल है, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई बेहद जरूरी है. शुरुआती दौर में की गई छोटी सी गलती भी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है. इसलिए गेंहू के फसल की शुरुआती देखभाल अत्यधिक आवश्यक मानी जाती है.

पहली सिंचाई के बाद खाद देना जरूरी

एक्सपर्ट बताते हैं कि गेहूं की पहली पटवन के बाद यदि समय पर खाद और पोषक तत्व नहीं दिए गए, तो फसल में पीलापन आने लगता है. इसलिए पहली सिंचाई के तुरंत बाद यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का प्रयोग करना जरूरी है. इससे फसल में फुटाव अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है.

21 से 25 दिन में करें पहली सिंचाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गेहूं की बुवाई के 21 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए. इसी समय फसल में टिलरिंग यानी शाखाएं निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है. जितनी अधिक शाखाएं निकलेंगी, उतनी ही अधिक बालियां बनेंगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. इस समय पोषण की कमी से फसल कमजोर रह जाती है.

पहली पटवन में किसान न करें यह गलती

कृषि वैज्ञानिक के अनुसार पहली सिंचाई के समय यूरिया डालना बेहद जरूरी है. यूरिया में मौजूद नाइट्रोजन पौधों की बढ़वार के लिए सबसे आवश्यक तत्व है. इससे गेहूं के पौधे हरे-भरे रहते हैं, तेजी से बढ़ते हैं और तना मजबूत बनता है. केवल सिंचाई पर ध्यान देना और खाद न डालना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

यूरिया के साथ जिंक सल्फेट भी जरूरी

यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का छिड़काव भी आवश्यक है. जिंक की कमी से गेहूं की पत्तियाँ पीला पड़ने लगती है, जिसे किसान अक्सर बीमारी समझ लेते हैं. वास्तव में यह जिंक की कमी का संकेत होता है. जिंक सल्फेट देने से जड़ें मजबूत होती हैं, शाखाएं अच्छी निकलती हैं और फसल स्वस्थ बनी रहती है.

लापरवाही से घट सकती है पैदावार

अगर किसान पहली सिंचाई के समय यूरिया और जिंक सल्फेट का उपयोग नहीं करते हैं, तो गेहूं में शाखाएं कम निकलेंगी. इससे बालियां भी कम बनेंगी और दाने छोटे रह जाएंगे. साथ ही पत्तियां पीली हो सकती हैं और कीट लगने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में किसानों को अच्छी पैदावार नहीं मिल पाती और नुकसान उठाना पड़ता है.

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