आम की फसल पर सफेद फंगस का खतरा, 70 फीसदी तक हो सकता है नुकसान.. करें इस दवा का छिड़काव
आम की फसल में मंजर के समय सफेद फंगस यानी पाउडरी मिल्ड्यू बड़ा नुकसान कर सकता है. समय पर पहचान और सही दवा का छिड़काव जरूरी है. सल्फर, हेक्साकोनाजोल या नीम तेल से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.
Mango Farming: आम का सीजन आते ही किसानों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं, लेकिन इसी समय एक खतरनाक बीमारी उनकी मेहनत पर पानी फेर सकती है. मंजर पर दिखने वाला सफेद फंगस यानी पाउडरी मिल्ड्यू आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो पेड़ पर फल लगना भी रुक सकता है. NHRDF के संयुक्त निदेशक, डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी और सही दवा के इस्तेमाल से इस बीमारी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.
क्या है मंजर का सफेद रोग और कैसे फैलता है
NHRDF के संयुक्त निदेशक, डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, आम के पेड़ों में मंजर आने के समय यह सफेद रोग तेजी से फैलता है. इसे पाउडरी मिल्ड्यू कहा जाता है. यह रोग पत्तियों, फूलों और मंजर पर सफेद पाउडर जैसी परत के रूप में दिखाई देता है. यह बीमारी ठंडे और सूखे मौसम में ज्यादा तेजी से फैलती है. अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह मंजर को सुखा देती है और फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है.
समय पर पहचान बेहद जरूरी
इस बीमारी की सबसे बड़ी पहचान है सुबह के समय पत्तियों और मंजर पर सफेद चूर्ण जैसा दिखना. शुरुआत में यह हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर पूरे हिस्से को ढक लेता है. विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही ये लक्षण दिखें, तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए. देर करने से फसल को 30 से 70 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है.
ऐसे करें तुरंत बचाव और रोकथाम
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, रोग दिखते ही सबसे पहले प्रभावित टहनियों और मंजर को काटकर अलग कर दें और नष्ट कर दें. इससे संक्रमण फैलने से रुकता है. इसके अलावा बगीचे की नियमित निगरानी करते रहें. साफ-सफाई और सही दूरी बनाए रखने से भी इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है.
दवा का सही इस्तेमाल देगा बेहतर परिणाम
विशेषज्ञ के अनुसार, इस रोग के नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक (सल्फर) बहुत असरदार है. इसे 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. इसके अलावा हेक्साकोनाजोल या ट्रायडेमेफॉन दवा को 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना फायदेमंद होता है. जैविक खेती करने वाले किसान नीम तेल का उपयोग भी कर सकते हैं.
बगीचे में पौधों के बीच सही दूरी रखना बहुत जरूरी है, ताकि हवा का अच्छा संचार बना रहे. ज्यादा नमी और भीड़-भाड़ इस रोग को बढ़ावा देती है. अगर किसान समय पर छिड़काव करें और सही देखभाल रखें, तो इस बीमारी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. इससे पेड़ों पर अच्छे फल लगते हैं और उत्पादन भी बेहतर होता है.