देश में चीनी उत्पादन बढ़ा लेकिन किसानों का भुगतान अटका, चीनी मिलों ने MSP बढ़ाने की उठाई मांग

चीनी उद्योग लंबे समय से सरकार से न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग कर रहा है. ISMA का कहना है कि मौजूदा लागत के हिसाब से MSP कम है, जिससे मिलों को नुकसान हो रहा है. अगर MSP बढ़ाया जाता है, तो मिलों को बेहतर दाम मिलेगा, जिससे वे किसानों का भुगतान जल्दी कर पाएंगे.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 18 Mar, 2026 | 11:34 AM

India sugar production 2025-26: देश में चीनी उत्पादन को लेकर इस बार अच्छी खबर सामने आई है. चालू 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में अब तक चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 15 मार्च 2026 तक देश में कुल 26.21 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 10.5 फीसदी ज्यादा है. यानी सीजन अभी खत्म भी नहीं हुआ है और उत्पादन पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इससे यह साफ होता है कि इस साल गन्ने की पैदावार अच्छी रही और मिलों ने भी तेजी से उत्पादन किया.

सीजन आखिरी दौर में, फिर भी उत्पादन तेज

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, जैसे-जैसे मार्च का महीना आगे बढ़ रहा है, चीनी उत्पादन का सीजन भी अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है. 15 मार्च तक देश में 157 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि 379 मिलें अपना काम बंद कर चुकी थीं. हर साल की तरह इस बार भी सीजन के अंत में कई मिलें बंद हो जाती हैं, क्योंकि गन्ने की उपलब्धता कम होने लगती है. लेकिन इसके बावजूद इस बार उत्पादन की रफ्तार अच्छी बनी हुई है, जो उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है.

राज्यों में कैसी रही उत्पादन की स्थिति

अगर राज्यवार बात करें तो महाराष्ट्र एक बार फिर देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक बनकर सामने आया है. यहां 15 मार्च तक 9.84 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल इसी समय यह 7.87 मिलियन टन था. यह बढ़ोतरी बताती है कि इस बार महाराष्ट्र में गन्ने की फसल बेहतर रही.

उत्तर प्रदेश, जो दूसरे नंबर पर है, वहां 8.13 मिलियन टन उत्पादन हुआ है. यूपी में भी इस बार उत्पादन स्थिर और मजबूत रहा है.

कर्नाटक तीसरे स्थान पर है, जहां 4.60 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ है. ISMA के अनुसार, दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलें जून से सितंबर के बीच विशेष सीजन में दोबारा चालू हो सकती हैं, जिससे आगे भी उत्पादन में मदद मिलेगी.

उत्पादन बढ़ा, लेकिन मिलों की मुश्किलें भी बढ़ीं

जहां एक ओर उत्पादन बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है. ISMA ने साफ कहा है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिलों को चीनी बेचने पर उतना दाम नहीं मिल रहा है. इसका सीधा असर मिलों के कैश फ्लो पर पड़ रहा है. यानी मिलों के पास खर्च निकालने और किसानों को समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बच पा रहा है.

किसानों का बकाया बढ़ा, चिंता बढ़ी

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का बकाया तेजी से बढ़ा है. 28 फरवरी 2026 तक यहां बकाया राशि 4,898 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो पिछले साल इसी समय 2,849 करोड़ रुपये थी. इसका मतलब है कि किसानों को उनके गन्ने का पैसा समय पर नहीं मिल पा रहा है. यह स्थिति किसानों के लिए चिंता की बात है, क्योंकि उनकी अगली फसल और खर्च इसी भुगतान पर निर्भर करते हैं.

MSP बढ़ाने की मांग क्यों जरूरी

चीनी उद्योग लंबे समय से सरकार से न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग कर रहा है. ISMA का कहना है कि मौजूदा लागत के हिसाब से MSP कम है, जिससे मिलों को नुकसान हो रहा है.

अगर MSP बढ़ाया जाता है, तो मिलों को बेहतर दाम मिलेगा, जिससे वे किसानों का भुगतान जल्दी कर पाएंगे. साथ ही बाजार में स्थिरता भी बनी रहेगी. उद्योग का यह भी कहना है कि MSP बढ़ाने से सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे पूरी सप्लाई चेन को फायदा होगा.

आने वाले समय में चीनी उत्पादन धीरे-धीरे कम हो सकता है, क्योंकि सीजन खत्म होने वाला है. लेकिन अगर दक्षिण भारत में विशेष सीजन के दौरान मिलें दोबारा चालू होती हैं, तो उत्पादन को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है. इसके साथ ही, सरकार अगर MSP को लेकर फैसला लेती है, तो इससे उद्योग और किसानों दोनों को राहत मिल सकती है.

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