India sugar exports 2025-26: भारत का चीनी उद्योग इस समय घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए है. चालू 2025-26 चीनी विपणन वर्ष (अक्टूबर से सितंबर) के शुरुआती पांच महीनों में देश से बड़ी मात्रा में चीनी का निर्यात हुआ है.
ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के मुताबिक अक्टूबर से फरवरी के बीच भारत ने लगभग 3.15 लाख टन चीनी विदेशों को निर्यात की है. इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय चीनी का सबसे बड़ा आयातक बनकर सामने आया है. हालांकि इस वर्ष कुछ राज्यों में मौसम की खराब स्थिति के कारण चीनी उत्पादन के अनुमान में थोड़ी कमी भी दर्ज की गई है.
सरकार की अनुमति से होता है चीनी निर्यात
भारत में चीनी का निर्यात पूरी तरह से सरकार की नीति के तहत किया जाता है. सरकार चीनी मिलों को कोटा के आधार पर निर्यात की अनुमति देती है, ताकि देश में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर असर न पड़े.
चालू 2025-26 विपणन वर्ष के लिए केंद्र सरकार ने कुल 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है. इसमें हाल ही में अतिरिक्त 5 लाख टन निर्यात की मंजूरी भी शामिल की गई है. इस निर्यात कोटे को देश की विभिन्न चीनी मिलों के बीच उनके उत्पादन के अनुसार बांटा जाता है.
किस प्रकार की चीनी का हुआ निर्यात
AISTA के अनुसार अक्टूबर से फरवरी के बीच जो 3.15 लाख टन चीनी निर्यात हुई, उसमें सबसे ज्यादा हिस्सा सफेद चीनी का रहा. इस अवधि में करीब 2,57,971 टन सफेद चीनी विदेश भेजी गई, जबकि 53,664 टन रिफाइंड चीनी का निर्यात किया गया. भारतीय चीनी की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण कई देशों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है.
किन देशों ने खरीदी सबसे ज्यादा चीनी
इस दौरान भारतीय चीनी का सबसे बड़ा खरीदार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) रहा. वहां करीब 79,683 टन चीनी भेजी गई. इसके बाद दूसरे स्थान पर अफगानिस्तान रहा, जहां 71,813 टन चीनी का निर्यात हुआ. इसके अलावा जिबूती को 45,801 टन और तंजानिया को 21,330 टन चीनी भेजी गई. एशिया और खाड़ी क्षेत्र के कई अन्य देशों में भी भारतीय चीनी की मांग बनी हुई है, जिससे आने वाले महीनों में निर्यात बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
आगे और बढ़ सकता है निर्यात
बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी का कहना है कि आने वाले समय में भारत से चीनी की शिपमेंट और बढ़ सकती है. उनके अनुसार एशियाई और खाड़ी देशों को मिलाकर 8 लाख टन से अधिक चीनी की वास्तविक आपूर्ति संभव है. उन्होंने कहा कि कई देशों में भारतीय चीनी की मांग बनी हुई है और अगर वैश्विक बाजार में स्थिति अनुकूल रहती है तो निर्यात के और अवसर भी मिल सकते हैं.
मौसम के कारण उत्पादन अनुमान घटा
हालांकि निर्यात के बीच उत्पादन को लेकर थोड़ी चिंता भी सामने आई है. AISTA ने अपने दूसरे अनुमान में बताया है कि 2025-26 सीजन में भारत का कुल चीनी उत्पादन लगभग 28.3 मिलियन टन रहने की संभावना है. यह पहले जारी किए गए 29.6 मिलियन टन के शुरुआती अनुमान से करीब 4.4 प्रतिशत कम है. इसका मुख्य कारण गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल स्थिति और कम पैदावार बताया गया है.
किसानों और उद्योग के लिए अहम क्षेत्र
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में से एक है. देश में गन्ने की खेती लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है. चीनी मिलों, किसानों और निर्यातकों के लिए यह उद्योग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति बेहतर रहती है और वैश्विक बाजार में मांग बनी रहती है, तो आने वाले समय में भारत का चीनी निर्यात और मजबूत हो सकता है. सरकार की संतुलित निर्यात नीति और किसानों की मेहनत के कारण भारतीय चीनी उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है.