गहराने लगा दिल्ली में पेयजल संकट, नई बोरवेल पॉलिसी लागू करेगी सरकार.. खर्च होंगे 9 हजार करोड़   

Water Supply Delhi: देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर खतरनाक स्तर पर नीचे जाते हुए 300 फीट के नीचे चला गया है. इससे जलसंकट गहरा गया है. दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर 300 फीट की गहराई में चला गया है. गर्मियां आते ही दिल्ली के जलसंकट को दूर करने के लिए नई बोरवेल पॉलिसी लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 1 May, 2026 | 03:03 PM

गिरते भूजल स्तर ने पेयजल संकट को और गंभीर बना दिया है. दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर 300 फीट की गहराई में चला गया है. तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही दिल्ली में पेयजल संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है. पेयजल आपूर्ति के लिए राज्य सरकार नई बोरवेल पॉलिसी लागू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए 9 हजार करोड़ रुपये फंड बजट में खर्च किए जाने की घोषणा की गई थी. इसके अलावा अवैध बोरवेल पर कार्रवाई के लिए नोटिस भेजे जा चुके हैं. वहीं, नए बोरवेल नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है.

देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर गिरा, नए बोरवेल पर प्रतिबंध

देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर खतरनाक स्तर पर नीचे जाते हुए 300 फीट के नीचे चला गया है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार और पंजाब के मोगा, संगरूर, दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर 300 फीट की गहराई में चला गया है. इन इलाकों को डार्क जोन और रेड जोन घोषित किया जा चुका है. यूपी के बांदा के तिंदवारी इलाके को 10 साल पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है. मध्य प्रदेश में नए बोरवेल करने पर जुलाई तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है.

दिल्ली से सटे इलाकों में बिगड़ रहे हालात

देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर खतरे के निशान से भी नीचे चला गया है. भूजल बोर्ड ने कई इलाकों में भू-जल 300 फीट से भी नीचे जाने की बात कही है और इसके चलते कई क्षेत्र डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं. जबकि, दिल्ली से सटे इलाके गुरुग्राम, फरीदाबाद के कई गांव रेड और डार्क जोन में हैं. कुछ जगहों पर बोरवेल 300 फीट या उससे ज्यादा गहराई तक किए जा रहे हैं.

पानी की कमी की चिंताओं से निपटने के लिए बोरवेल पॉलिसी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली सरकार शहर में पानी की कमी की समस्याओं को कम करने के लिए एक बोरवेल पॉलिसी लाने की योजना बना रही है. उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा वर्षा जल संचयन कार्यक्रम ‘कैच द रेन’ में भाग लिया और कहा कि दिल्ली सरकार बोरवेल पॉलिसी लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. लेकिन केवल वे घर और आवासीय कॉलोनियां जिनके पास ठीक से काम करने वाला जल संचयन सिस्टम है, उन्हें ही अधिकृत बोरवेल लगवाने की अनुमति मिलेगी.

नए बोरवेल के लिए नियम आसान किए जाएंगे

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा की ओर से कहा गया है कि जल्द ही, दिल्ली सरकार एक नई बोरवेल पॉलिसी की घोषणा करेगी जिसके तहत घरेलू उपयोगकर्ताओं को आसानी से अनुमति दी जाएगी. उन्होंने कहा कि बोरवेल लगवाने के लिए कई अनुमतियों की आवश्यकता होती है. नई पॉलिसी के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को बहुत कम शुल्क पर अनुमति दी जाएगी और जिला मजिस्ट्रेट से NOC लेने को आसान बनाया जाएगा.

दिल्ली के अवैध बोरवेल संचालकों को नोटिस भेजे

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई अवैध बोरवेल चल रहे हैं. ऐसे लोगों को नोटिस दिए गए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में लगभग 5,000 बोरवेल हैं, लेकिन अधिकारी दावा करते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगले कुछ वर्षों में शहर की कुल सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाकर 1,500 मिलियन गैलन प्रति दिन (MGD) करने पर काम कर रही है.

पेयजल संकट दूर करने के लिए 9 हजार करोड़ का बजट

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए पेश बजट में कुल अनुमानित खर्च प्रस्ताव 1,03,700 करोड़ रुपये तय किया. जिसमें दिल्ली के पेयजल संकट दूर करने पर बड़ा ऐलान करते हुए 9000 हजार करोड़ रुपये जल बोर्ड के लिए आवंटित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि पानी की नई पाइपलाइन परियोजनाएं चल रही हैं, और पानी तथा सीवेज प्रबंधन के लिए दिल्ली जल बोर्ड को 9,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी निवासी को पानी के लिए परेशान होने या पानी के टैंकर के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चंद्रावल जल उपचार संयंत्र (water treatment plant) के लिए 475 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. शहर की सरकार कर्मचारियों के लिए एक एकीकृत सचिवालय और आवासीय परिसर भी बनाएगी.

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