कपास की फसल पर सफेद मक्खी का हमला, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी.. तुरंत करें ये काम
पंजाब में कपास की फसल पर व्हाइटफ्लाई का खतरा बढ़ गया है. PAU ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी और समय पर कीटनाशक छिड़काव की सलाह दी है. विश्वविद्यालय ने ग्रीन लीफहॉपर, पिंक बॉलवर्म और व्हाइट बॉलवर्म से भी सतर्क रहने को कहा है. वहीं, 33 फीसदी बीज सब्सिडी के बावजूद कपास योजना में किसानों का पंजीकरण 63 फीसदी घट गया है.
Cotton Farming: पंजाब के कपास किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के ताजा सर्वे में राज्य के कई कपास उत्पादक इलाकों में व्हाइटफ्लाई (सफेद मक्खी) का प्रकोप बढ़ता मिला है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा मौसम बना रहा तो अगले एक सप्ताह में इसका असर और बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने किसानों से कहा है कि वे अपने कपास के खेतों की नियमित निगरानी करें. यदि एक पत्ती पर औसतन 6 व्हाइटफ्लाई दिखाई दें, तो तुरंत नियंत्रण के उपाय शुरू कर दें. इसे आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) माना जाता है. साथ ही व्हाइटफ्लाई से बचाव के लिए PAU ने किसानों को सलाह दी है कि वे कृषि विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार फ्लोनिकामिड (Flonikamid), एफिडोपायरोपेन (Afidopyropen) या पाइरिफ्लुक्विनाजोन (Pyrifluquinazon) में से किसी एक की निर्धारित मात्रा का छिड़काव करें. इससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.
PAU की किसानों को सलाह, कपास में इन कीटों पर भी रखें नजर
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने किसानों को सिर्फ व्हाइटफ्लाई ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख कीटों पर भी नजर रखने की सलाह दी है. विश्वविद्यालय के अनुसार, किसान अपने खेतों में ग्रीन लीफहॉपर की नियमित निगरानी करें. यदि पूरी तरह विकसित पत्तियों में से 50 फीसदी पत्तियों के किनारे पीले पड़ने लगें और वे नीचे की ओर मुड़ने लगें, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें.
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कब करें पिंक बॉलवर्म से बचाव के उपाय
वहीं, जल्दी बोई गई कपास में पिंक बॉलवर्म से बचाव के लिए तब नियंत्रण शुरू करने की सलाह दी गई है, जब खेत में 10 से 20 फीसदी पौधों पर फूल की कलियां (फ्लावर बड) आने लगें. इस समय अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव प्रभावी माना जाता है. इसके अलावा, देसी कपास में व्हाइट बॉलवर्म के प्रबंधन के लिए PAU ने कहा है कि जब लगभग 25 फीसदी पौधों पर फूल आ जाएं, तब सिफारिश किए गए किसी एक कीटनाशक का छिड़काव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.
बीजों पर मिलेगी 33 प्रतिशत सब्सिडी
बता दें कि पंजाब सरकार कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है, लेकिन इसके बावजूद किसानों का रुझान कम होता दिख रहा है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल सिर्फ 19,000 किसानों ने इस योजना के लिए पंजीकरण कराया है, जबकि 2025 में 52,000 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. यानी एक साल में पंजीकरण करीब 63 प्रतिशत घट गया है. अधिकारियों का कहना है कि 2021 से लगातार कीटों के हमले और खराब मौसम के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इससे किसानों का इस फसल पर भरोसा कम हो गया है और वे दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.