बकरी पालन में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना बीमार पड़ेंगे पशु और होगा भारी नुकसान

बकरी पालन में छोटी-छोटी गलतियां भी बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण, नियमित दवा, संतुलित आहार और साफ-सुथरा शेड पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं. वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान पशुओं की मृत्यु दर कम कर सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 4 Aug, 2026 | 11:51 AM

Goat Farming: बकरी पालन आज किसानों के लिए कम लागत में अच्छी कमाई का भरोसेमंद व्यवसाय बनता जा रहा है. कम जगह, कम निवेश और तेजी से बढ़ने वाली संख्या के कारण बड़ी संख्या में किसान इस व्यवसाय को अपना रहे हैं. लेकिन यदि बकरियों की देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए, तो बीमारी फैलने, पशुओं की मौत और भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार, यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करें, समय पर टीकाकरण कराएं और सही पोषण दें, तो नुकसान से बचते हुए बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

समय पर टीकाकरण और दवा देना सबसे जरूरी

डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार, बकरी पालन में सबसे पहले पशुओं के स्वास्थ्य  पर ध्यान देना चाहिए. संक्रामक बीमारियां बहुत तेजी से पूरे झुंड में फैल सकती हैं. इसलिए तय समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही हर 3 से 6 महीने के अंतराल पर पेट के कीड़ों की दवा भी जरूर देनी चाहिए. नियमित स्वास्थ्य जांच कराने से बीमारी का पता शुरुआती अवस्था में चल जाता है और समय पर इलाज संभव हो जाता है. इससे पशुओं की मृत्यु दर कम होती है और उत्पादन बेहतर रहता है.

तनाव से बचाएं, तभी स्वस्थ रहेंगी बकरियां

विशेषज्ञ बताते हैं कि बकरियां दूसरे कई पशुओं की तुलना  में जल्दी तनाव में आ जाती हैं. अधिक गर्मी, लंबी दूरी तक परिवहन, खराब खानपान, भीड़भाड़ या अचानक वातावरण बदलने से बकरियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. तनाव की स्थिति में उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे जल्दी बीमार पड़ सकती हैं. इसलिए बकरियों को आरामदायक वातावरण, साफ पानी और संतुलित आहार उपलब्ध कराना जरूरी है. अनावश्यक रूप से उन्हें बार-बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से भी बचना चाहिए.

सही शेड और अच्छी नस्ल का करें चयन

बकरी पालन में अच्छी नस्ल  चुनना भी सफलता की महत्वपूर्ण शर्त है. स्थानीय जलवायु के अनुसार उपयुक्त नस्ल का चयन करने से पशु जल्दी बीमार नहीं पड़ते और उनका उत्पादन भी बेहतर रहता है. बकरियों के लिए ऐसा शेड बनाना चाहिए, जहां पर्याप्त धूप और ताजी हवा आती हो. फर्श ऊंचा, सूखा और साफ होना चाहिए ताकि नमी न बने. बरसात के मौसम में पानी जमा होने से कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं, इसलिए पानी की निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है.

वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बढ़ाएं मुनाफा

डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार, बकरी पालन में छोटी-छोटी सावधानियां बड़े नुकसान से बचा सकती हैं. संतुलित पोषण, साफ-सफाई, नियमित टीकाकरण, समय पर दवा और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से पशु स्वस्थ रहते हैं और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती है. इससे दूध और मांस उत्पादन में सुधार होता है, मृत्यु दर घटती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है. यदि किसान बिना लापरवाही के वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करें, तो यह व्यवसाय लंबे समय तक स्थायी और लाभदायक आय का मजबूत स्रोत बन सकता है.

Published: 4 Aug, 2026 | 10:47 AM

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