भैंसों के IVF से बिहार में नई क्रांति, डेयरी सेक्टर और किसानों की बदलेगी किस्मत
बिहार में पशुपालन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी शुरुआत हुई है जहां भैंसों पर पहली बार IVF तकनीक का सफल प्रयोग किया जा रहा है. इससे उन्नत नस्ल के जानवर तैयार होंगे और दूध उत्पादन में वृद्धि होगी. किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है और डेयरी सेक्टर को नई दिशा मिलेगी.
IVF Technology: बिहार में पशुपालन के क्षेत्र में एक नई पहल शुरू हुई है. अब तक इंसानों और गायों में इस्तेमाल होने वाली आईवीएफ (IVF) तकनीक को पहली बार भैंसों पर भी लागू किया जा रहा है. इस काम को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने सफलतापूर्वक शुरू किया है. इसका उद्देश्य बेहतर नस्ल की भैंस तैयार करना और दूध उत्पादन बढ़ाना है. इस तकनीक के जरिए खासकर मुर्रा और ब्लैक डायमंड कही जाने वाली भैंसों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकेगा.
इस पहल से किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. अगर भैंस ज्यादा दूध देगी तो किसान की आमदनी भी बढ़ेगी. साथ ही डेयरी सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी. फिलहाल यह काम परीक्षण स्तर पर है, लेकिन जल्द ही इसे आम किसानों तक पहुंचाने की योजना है.
क्या है IVF तकनीक और कैसे काम करती है
आईवीएफ एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसका इस्तेमाल नस्ल सुधार के लिए किया जाता है. सामान्य तरीके में एक भैंस या गाय साल में सिर्फ एक ही बच्चा देती है. लेकिन इस तकनीक के जरिए एक ही अच्छी नस्ल वाली मादा से कई बच्चे पैदा कराए जा सकते हैं. इस प्रक्रिया में सबसे पहले अच्छी नस्ल वाली मादा (डोनर) से अंडाणु लिया जाता है. फिर प्रयोगशाला में उसका निषेचन (फर्टिलाइजेशन) किया जाता है. लगभग 7 दिन में भ्रूण (एम्ब्रियो) तैयार हो जाता है. इसके बाद इस भ्रूण को दूसरी स्वस्थ भैंस (सरोगेट) के गर्भ में डाल दिया जाता है. इस तरह एक ही अच्छी नस्ल से कई भैंसों में बच्चे पैदा किए जा सकते हैं. इससे कम समय में ज्यादा संख्या में उन्नत नस्ल तैयार होती है और दूध उत्पादन तेजी से बढ़ता है.
किसानों को क्या होगा फायदा
इस तकनीक से किसानों को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं. सबसे बड़ा फायदा है दूध उत्पादन में बढ़ोतरी. अगर भैंस अच्छी नस्ल की होगी तो वह ज्यादा दूध देगी, जिससे किसान की कमाई बढ़ेगी. दूसरा फायदा यह है कि अब किसानों को अच्छी नस्ल के जानवर पाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. IVF के जरिए जल्दी और ज्यादा संख्या में अच्छे बच्चे मिल सकते हैं. तीसरा फायदा यह है कि डेयरी बिजनेस करने वालों के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी साबित होगी. इससे उनका उत्पादन बढ़ेगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा. फिलहाल यह सुविधा विश्वविद्यालय में मुफ्त दी जा रही है. लेकिन आगे चलकर इसके लिए लगभग 10 हजार रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है, जो कि अन्य जगहों की तुलना में काफी कम है.
गायों में पहले मिल चुके हैं अच्छे परिणाम
आईवीएफ तकनीक पहले गायों पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा चुकी है. इस तकनीक से कई बछड़ों का जन्म हो चुका है और कई गायें गर्भवती भी हैं. इससे यह साबित हो चुका है कि यह तरीका कामयाब है और अच्छे परिणाम देता है. अब इसी सफलता को भैंसों में दोहराने की कोशिश की जा रही है. शुरुआती चरण में कुछ भैंसों पर यह तकनीक सफल रही है और उम्मीद है कि आने वाले समय में इससे और बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे. विश्वविद्यालय की योजना है कि भविष्य में इस तकनीक को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जाए. साथ ही किसान वहां से भ्रूण भी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे वे अपने पशुपालन को और बेहतर बना सकें.