पशुपालन पर खर्च होंगे 1200 करोड़, नस्ल सुधार के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना

मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालन को मजबूत बनाने के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है. राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत उन्नत नस्ल बढ़ाने और पशु अस्पतालों के विकास पर बड़ी राशि दी जाएगी. इससे किसानों को तकनीकी सहायता और बेहतर पशु स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 5 Mar, 2026 | 05:28 PM

Gokul Mission: मध्यप्रदेश में पशुपालन को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट में पशुधन विकास को लेकर अहम फैसले लिए गए. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि खेती के साथ-साथ पशुपालन भी गांव की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेगा. इसी सोच के साथ लगभग 1200 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है. इस राशि के जरिए नस्ल सुधार के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन के प्रोडक्शन को बढ़ाया जाएगा. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों को सीधा फायदा मिल सकेगा.

गोकुल मिशन के तहत 656 करोड़ रुपये की मंजूरी

राष्ट्रीय गोकुल मिशन  योजना के अंतर्गत सोर्टेड सेक्स्ड सीमन उत्पादन परियोजना को 31 मार्च 2031 तक लगातार चलाने के लिए 656 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इस योजना का मकसद अच्छी नस्ल की मादा गाय और भैंसों की संख्या बढ़ाना है. सरल भाषा में समझें तो इस तकनीक से ऐसे बछड़ों का जन्म बढ़ाया जाएगा, जो आगे चलकर दुधारू पशु बनें. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में सुधार होगा. पशुपालकों को इस प्रक्रिया में जरूरी तकनीकी मदद भी दी जाएगी. इससे उन्हें बेहतर नस्ल, ज्यादा दूध और लंबी अवधि में अधिक मुनाफा मिल सकेगा.

पशु चिकित्सा पर खर्च होंगे 610 करोड़ रुपये

सिर्फ नस्ल सुधार ही नहीं, पशुओं के स्वास्थ्य  पर भी सरकार खास ध्यान दे रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों तक पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए 610.51 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. इस राशि से पशु चिकित्सालयों और अन्य भवनों का अधोसंरचनात्मक विकास किया जाएगा. मतलब जहां अस्पतालों की कमी है, वहां नए केंद्र बनेंगे या पुराने अस्पतालों को मजबूत किया जाएगा. इलाज के बेहतर इंतजाम होने से पशुओं की बीमारियों का समय पर इलाज होगा और मृत्यु दर कम होगी. इससे सीधे तौर पर पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा.

किसानों को कैसे मिलेगा सीधा लाभ

इन दोनों योजनाओं का फायदा सीधे पशुपालकों को मिलेगा. बेहतर नस्ल की गाय और भैंसें होंगी तो दूध उत्पादन बढ़ेगा. जब दूध ज्यादा होगा तो डेयरी कारोबार मजबूत होगा और किसान की आय बढ़ेगी. दूसरी तरफ, अगर गांव में ही अच्छा पशु चिकित्सालय उपलब्ध होगा तो पशु बीमार होने पर दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा. समय और पैसा दोनों बचेंगे. समय पर इलाज मिलने से पशु जल्दी ठीक होंगे और दूध देने की क्षमता बनी रहेगी. सरकार का मानना है कि खेती और पशुपालन साथ-साथ चलें तो किसान की आमदनी स्थिर और मजबूत रहती है. यही वजह है कि पशुधन विकास पर इतना बड़ा निवेश किया जा रहा है.

गांव की अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

लगभग 1200 करोड़ रुपये का यह निवेश सिर्फ पशुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे ग्रामीण तंत्र पर पड़ेगा. ज्यादा दूध उत्पादन  से डेयरी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए मौके बनेंगे और गांव में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा. इसके साथ ही, अच्छी नस्ल और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से पशुपालन एक सुरक्षित और लाभकारी व्यवसाय बनेगा. इससे युवा भी इस क्षेत्र में आगे आ सकते हैं.

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