बासमती निर्यातकों को बड़ी राहत, 50 लाख तक की मिलेगी मदद.. 30 दिनों में सभी क्लेम का निपटारा

ईरान-इजराइल जंग के बीच भारत सरकार ने बासमती चावल निर्यातकों को राहत देने के लिए बड़े कदम उठाए. ECGC ने 30 दिनों में क्लेम निपटाने और अतिरिक्त खर्च शामिल करने का भरोसा दिया है. RoDTEP विस्तार, शिपिंग समस्याओं का समाधान और APEDA का समर्थन व्यापार को स्थिर बनाएगा और निर्यातकों की अनिश्चितता कम करेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 25 Mar, 2026 | 05:48 PM

Basmati Export: ईरान-इजरायल जंग के बीच बासमती निर्यातकों के हित में केंद्र सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं. सरकार के इस कदम से बासमती निर्यात में आ रहीं समस्याओं से निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी. भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड (ECGC ) ने बासमती निर्यातकों को भरोसा दिया है कि मल्टी बायर ओपन पॉलिसी के तहत किए गए सभी क्लेम 30 दिनों के भीतर निपटा दिए जाएंगे. साथ ही बढ़े हुए शिपमेंट फेयर, डिटेंशन और डिमरेज जैसे अतिरिक्त खर्च भी क्लेम में शामिल किए जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से बासमती निर्यातकों को काफी फायदा होगा.

दरअसल, बुधवार को बासमती चावल के निर्यातकों की दिक्कतों को समझने और उन्हें जल्दी मदद देने के लिए एक बड़ी बैठक की गई. इसमें सरकार के बड़े अधिकारी और अलग-अलग संस्थानों के लोग शामिल हुए. इस बैठक में ECGC ने कहा है कि सभी क्लेम 30 दिनों के अंदर निपटा दिए जाएंगे. साथ ही क्लेम में बढ़ी हुई शिपमेंट फेयर, देरी का खर्च (डिटेंशन और डिमरेज) भी शामिल होगा. जिन निर्यातकों  के पास ECGC कवर नहीं है, उन्हें भी 50 लाख रुपये तक मदद मिलेगी. इसके अलावा, प्रीमियम दरें नहीं बढ़ेंगी, जिससे उन पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

RoDTEP योजना का होगा विस्तार

बैठक में यह भी बताया गया कि 31 मार्च को खत्म हो रही RoDTEP योजना को अगले वित्तीय वर्ष के लिए जल्द बढ़ाया जा सकता है. वहीं, शिपिंग मंत्रालय जल्द ही बड़ी शिपिंग कंपनियों के साथ बैठक करेगा, ताकि बढ़ते फ्रेट रेट, कंटेनर की कमी और लॉजिस्टिक समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.  इसके अलावा, APEDA ने भरोसा दिलाया कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है, ताकि निर्यात से जुड़ी समस्याएं जल्दी सुलझें और व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे. यानी इस बैठक से साफ होता है कि सरकार और उसकी एजेंसियां मिलकर बासमती चावल के निर्यात  क्षेत्र को इस मुश्किल समय में मजबूत समर्थन देने की कोशिश कर रही हैं. निर्यातकों ने भरोसा जताया कि ये समय पर उठाए गए कदम व्यापार को स्थिर करने और अनिश्चितताओं को कम करने में मदद करेंगे.

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

इस बैठक में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक में लव अग्रवाल (डीजीएफटी), नितिन कुमार यादव (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय), अभिषेक देव (एपीडा), अमित कुमार (ईसीजीसी) और डॉ. सुधांशु सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इसके साथ ही देशभर से बड़ी संख्या में बासमती चावल के निर्यातकों ने भी भाग लिया और अपनी समस्याएं रखीं.

निर्यातकों के सामने ये हैं समस्याएं

बता दें कि खाड़ी देशों में तनाव के चलते भारत से चावल निर्यात प्रभावित हुआ है. इससे बासमती की कीमतों में गिरावट आई है. हालांकि, चावल निर्यातकों का कहना है कि पुराने ऑर्डर तो भेजे जा रहे हैं, लेकिन नए ऑर्डर के लिए जहाज मिलना मुश्किल हो गया है, क्योंकि शिप मालिक इस जोखिम वाले क्षेत्र में जाने से बच रहे हैं. वहीं, कुछ खरीदारों ने फिलहाल नई खरीद थोड़ी धीमी कर दी है, क्योंकि उनके पास पहले से भेजा गया माल रास्ते में है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अगर यह समस्या लंबे समय तक चली, तो यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगी, क्योंकि यह क्षेत्र भारत से आने वाले खाद्य पदार्थों पर काफी निर्भर है.

भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है. साल 2025 में करीब 22 मिलियन टन यानी लगभग 40 फीसदी वैश्विक चावल निर्यात किया. भारत बासमती और नॉन-बासमती दोनों तरह का चावल बड़ी मात्रा में भेजता है. यह थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान से भी ज्यादा निर्यात करता है, जिससे मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में चावल की सप्लाई बनी रहती है.

 

 

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Published: 25 Mar, 2026 | 05:45 PM
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