Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में 1 जून से 30 सितंबर तक मॉनसून सीजन में 39 फीसदी ज्यादा बारिश हुई. यहां इस दौरान 1022.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य बारिश 734.4 मिमी होती है. इस भारी बारिश ने पहाड़ी राज्य में भारी तबाही मचाई, जिससे 4,881 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इस मॉनसून में राज्य में 47 क्लाउडबर्स्ट, 98 फ्लैश फ्लड और 148 बड़े भूस्खलन हुए, जिनमें 454 लोग अपनी जान गंवा बैठे.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हिमालयी राज्य में 20 जून को आया और 26 सितंबर को वापस चला गया. पिछले 29 सालों में मॉनसून का सबसे जल्दी आगमन 9 जून 2000 को हुआ था, जबकि सबसे देरी से 5 जुलाई 2010 को. सबसे जल्दी मॉनसून वापसी 18 सितंबर 2001 को हुई थी और सबसे देर से 11 अक्टूबर 2019 को. इस साल हिमाचल प्रदेश में 125 वर्षों में 15वां सबसे ज्यादा मॉनसून बारिश हुई, जो 1022.5 मिमी रही और पिछले 29 सालों में सबसे अधिक थी. 1901 से 2025 तक सबसे ज्यादा बारिश 1922 में 1314.6 मिमी रिकॉर्ड की गई थी.
बारिश से 9230 घर पूरी तरह से तबाह
मौसम विभाग ने कहा कि इस मॉनसून में जून में 34 फीसदी, अगस्त में 68 फीसदी और सितंबर में 71 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जबकि जुलाई में 2 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई. राज्य में 36 दिन बहुत भारी बारिश हुई. जून में 4 दिन, जुलाई में 8, अगस्त में 15 और सितंबर में 9 दिन बहुत अधिक बारिश हुई. वहीं, बारिश से जुड़े हादसों में 264 लोगों की मौत हुई और सड़क दुर्घटनाओं में 190 लोगों की जान गई. साथ ही 498 लोग घायल हुए और 50 अभी भी लापता हैं. 9230 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से खराब हुए. यह जानकारी 24 सितंबर को जारी राज्य आपातकालीन केंद्र की रिपोर्ट में दी गई.
अभी तक राज्य सरकार को नहीं मिला पैसा
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण के बाद जो 1,500 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया गया था, वह अभी तक राज्य सरकार को नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि लोग बहुत परेशान हैं और कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. राहत अगर एक या दो साल बाद मिले तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाता. लोगों को राहत अभी चाहिए.
क्या बोले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू
लंदन से वापस लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र की मदद चाहे जो भी हो, राज्य सरकार प्रभावित लोगों की हर तरह से मदद करेगी. जिनके घर पूरी तरह से नुकसान हुए हैं, उन्हें 7 लाख रुपये और जिनके घर आंशिक रूप से खराब हुए हैं, उन्हें 1 लाख रुपये दिए जाएंगे. जिन लोगों की जमीन, पशु या बाग-बगीचे खराब हुए हैं, उन्हें भी सहायता दी जाएगी.