पशुपालकों के लिए एडवाइजरी, अप्रैल में टीकाकरण जरूर करवाएं.. मेमनों को नहीं होगा रोग

अप्रैल के बदलते मौसम में भेड़ों, मेमनों और मुर्गियों में बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. समय पर टीकाकरण, फार्म की सफाई, सूखा लिटर, कृमिनाशक दवा और साफ पानी की व्यवस्था से संक्रमण और मृत्यु दर को काफी कम किया जा सकता है. विभाग की आसान सलाह पशुपालकों की आय सुरक्षित रखने में मदद करेगी.

नोएडा | Published: 4 Apr, 2026 | 09:50 PM

Bihar Animal Husbandry: अप्रैल का महीना शुरू होते ही मौसम तेजी से बदलने लगता है. दिन में गर्मी बढ़ती है, सुबह-शाम हल्की नमी रहती है और यही बदलाव पशुओं व पक्षियों में बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है. खासकर भेड़, मेमने और मुर्गी पालन करने वालों के लिए यह समय बेहद सावधानी वाला माना जाता है. अगर इस मौसम में साफ-सफाई, टीकाकरण और पानी की सही व्यवस्था पर ध्यान न दिया जाए, तो बीमारी तेजी से फैल सकती है और कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने अप्रैल माह के लिए पशुपालकों को जरूरी सलाह जारी करते हुए कुछ आसान उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर नुकसान से बचा जा सकता है.

भेड़ों और मेमनों में टीकाकरण सबसे जरूरी

अप्रैल में मौसम बदलने के साथ Sheep Pox (भेड़ चेचक) और Enterotoxaemia जैसी बीमारियों का खतरा  बढ़ जाता है. ये बीमारियां खासकर छोटे मेमनों में तेजी से फैलती हैं और समय पर इलाज न मिले तो मौत तक का कारण बन सकती हैं. इसी वजह से विभाग ने भेड़ पालकों को सलाह दी है कि वे मेमनों और बड़ी भेड़ों में पशु चिकित्सक की सलाह से टीका जरूर लगवाएं. समय पर वैक्सीनेशन कराने से बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है और झुंड सुरक्षित रहता है. भेड़ों के रहने की जगह सूखी और साफ रखें. गीली जमीन और गंदगी से संक्रमण तेजी से फैलता है. अगर किसी पशु में बुखार, शरीर पर दाने या कमजोरी दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

मुर्गीपालक फार्म की सफाई पर दें सबसे ज्यादा ध्यान

मुर्गी पालन में अप्रैल का मौसम संक्रमण फैलाने  वाला हो सकता है. गर्मी और हल्की नमी के कारण फार्म में बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनपते हैं. इसलिए विभाग ने मुर्गी पालकों को साफ कहा है कि लिटर हमेशा सूखा और साफ रखें. गीला लिटर मुर्गियों में बीमारी फैलाने का सबसे बड़ा कारण बनता है. फार्म की रोज सफाई करें, पानी के बर्तन धोते रहें और दाना रखने वाली जगह पर गंदगी न जमा होने दें. मुर्गियों को समय-समय पर पशु चिकित्सक की सलाह से कृमिनाशक दवा भी देना जरूरी है, ताकि पेट के कीड़े और कमजोरी की समस्या न बढ़े.

पानी और बाहरी परजीवी से बचाव भी जरूरी

अप्रैल में तापमान बढ़ने के कारण पशु और पक्षियों  को पानी ज्यादा चाहिए होता है. इसलिए साफ और ताजा पानी की समुचित व्यवस्था बहुत जरूरी है. गंदा पानी देने से संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं. भेड़ हो या मुर्गियां, पानी के बर्तन रोज साफ करना जरूरी है. इसके साथ ही विभाग ने पशुओं को बाहरी परजीवी जैसे जूं, किलनी और मक्खियों से बचाने की भी सलाह दी है. इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह से दवा का नियमित छिड़काव करना चाहिए. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं, खुजली और त्वचा रोग कम होते हैं और वजन बढ़ने पर भी अच्छा असर पड़ता है.

छोटी सावधानी बचाएगी बड़ा नुकसान

विशेषज्ञ मानते हैं कि अप्रैल का महीना पशुपालन में सावधानी का महीना होता है. इस समय टीकाकरण, सफाई, दवा और पानी जैसी छोटी बातें ही बड़े नुकसान से बचाती हैं. अगर भेड़ पालक मेमनों का समय पर टीका लगवा दें और मुर्गीपालक फार्म  को सूखा-साफ रखें, तो बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की यह सलाह साफ बताती है कि थोड़ी सी जागरूकता से पशुपालक अपनी आय सुरक्षित रख सकते हैं. सही समय पर सही कदम उठाने से बीमारी, मृत्यु दर और आर्थिक नुकसान-तीनों पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है.

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