एक चूक और तबाही तय! बर्ड फ्लू से कैसे बचाएं अपना पोल्ट्री फार्म

पोल्ट्री में मुनाफा तभी बढ़ता है, जब नुकसान कम हो. इसके लिए जरूरी है कि किसान एक दिन के छोटे चूजों की जगह चार से छह सप्ताह की उम्र की मुर्गियां खरीदें. इस उम्र की मुर्गियां थोड़ी मजबूत होती हैं, इन्हें कम देखभाल की जरूरत होती है और बीमारी से मरने की संभावना भी कम रहती है.

नई दिल्ली | Published: 3 Feb, 2026 | 11:40 AM

Bird flu: आज के समय में मुर्गी पालन किसानों के लिए कम लागत में अच्छी आमदनी का जरिया बन चुका है. गांव से लेकर शहर के आसपास तक पोल्ट्री फार्म तेजी से बढ़े हैं. लेकिन जैसे-जैसे यह कारोबार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बीमारियों का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है. इन्हीं बीमारियों में सबसे ज्यादा डराने वाला नाम है बर्ड फ्लू, जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है. यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो पूरा फार्म कुछ ही दिनों में खाली हो सकता है.

क्या है बर्ड फ्लू और क्यों है यह खतरनाक

बर्ड फ्लू एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करती है. यह वायरस मुर्गियों, बतखों, टर्की और अन्य पक्षियों में तेजी से फैलता है. कई बार यह बीमारी बिना ज्यादा लक्षण दिखाए भी फैलती रहती है और जब तक किसान को समझ आता है, तब तक नुकसान हो चुका होता है. अचानक पक्षियों की मौत, अंडा उत्पादन में गिरावट और पूरे इलाके में डर का माहौल बन जाना, यही इस बीमारी की पहचान है.

बायोसेक्योरिटी: बचाव की सबसे मजबूत दीवार

अगर बर्ड फ्लू से बचना है, तो सबसे पहले फार्म की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी. बायोसेक्योरिटी का मतलब है कि बीमारी को फार्म के अंदर आने से पहले ही रोक देना. फार्म में अनावश्यक लोगों की आवाजाही बंद रखें. बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति, वाहन या उपकरण को बिना साफ-सफाई के अंदर न आने दें. जूतों के लिए अलग जगह, हाथ धोने की व्यवस्था और कीटाणुनाशक का इस्तेमाल बहुत जरूरी है.

सही उम्र के पक्षी चुनना भी है जरूरी

पोल्ट्री में मुनाफा तभी बढ़ता है, जब नुकसान कम हो. इसके लिए जरूरी है कि किसान एक दिन के छोटे चूजों की जगह चार से छह सप्ताह की उम्र की मुर्गियां खरीदें. इस उम्र की मुर्गियां थोड़ी मजबूत होती हैं, इन्हें कम देखभाल की जरूरत होती है और बीमारी से मरने की संभावना भी कम रहती है. इससे शुरुआती जोखिम काफी हद तक घट जाता है.

जंगली पक्षी बन सकते हैं बीमारी का कारण

कई बार किसान इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि जंगली पक्षी भी बर्ड फ्लू फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. खुले फार्म में आने वाले कबूतर, कौए या अन्य पक्षी वायरस को अंदर ला सकते हैं. इसलिए फार्म के चारों ओर जाल या बाड़ लगाना जरूरी है. चारे और पानी के बर्तन हमेशा ढंके रखें, ताकि बाहर के पक्षी वहां न बैठ सकें.

साफ-सफाई से ही बनेगी बीमारी से दूरी

पोल्ट्री फार्म की सफाई सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव के लिए होती है. फर्श, दीवारें, पानी की टंकियां और फीडर को नियमित रूप से साफ और सैनीटाइज करना चाहिए. कर्मचारियों को भी काम के दौरान साफ कपड़े पहनने और हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए. गंदगी जितनी कम होगी, वायरस के पनपने की संभावना उतनी ही घटेगी.

नए पक्षियों को तुरंत झुंड में न मिलाएं

जब भी नए पक्षी फार्म में लाए जाएं, तो उन्हें सीधे पुराने पक्षियों के साथ न रखें. कम से कम दो से तीन हफ्ते तक अलग स्थान पर रखकर उनकी सेहत पर नजर रखें. अगर इस दौरान कोई लक्षण नजर आए, तो समय रहते बीमारी को रोका जा सकता है.

मरे हुए पक्षियों का सही निपटान बेहद जरूरी

अगर किसी कारण से पक्षी मर जाते हैं, तो उन्हें खुले में फेंकना बहुत खतरनाक हो सकता है. इससे वायरस आसपास फैल सकता है. ऐसे पक्षियों को गहरे गड्ढे में डालकर सुरक्षित तरीके से दफनाना चाहिए, ताकि बीमारी आगे न फैले.

सतर्कता ही सबसे बड़ा इलाज

बर्ड फ्लू का कोई आसान इलाज नहीं है, लेकिन सतर्कता से इसे रोका जरूर जा सकता है. स्थानीय पशुपालन विभाग और अधिकारियों से संपर्क में रहें, उनके दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध लक्षण को हल्के में न लें. सही समय पर उठाया गया एक कदम, आपके पूरे पोल्ट्री फार्म और मेहनत की कमाई को बचा सकता है.

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