पशुपालक सावधान! नया भूसा सीधे खिलाया तो हो सकती हैं गंभीर समस्याएं, अपनाएं ये ट्रिक

Animal Husbandry Tips: गेहूं का नया भूसा सख्त होने के कारण पशुओं के लिए पचाना मुश्किल होता है, जिससे पेट फूलना, कब्ज और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इसे सीधे न खिलाकर हरे चारे के साथ मिलाकर और भिगोकर देना बेहतर होता है. मिनरल मिक्सचर या गुड़-पानी मिलाने से इसका पोषण बढ़ता है. सही तरीके से दिया गया भूसा पशुओं की सेहत सुधारता है और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

नोएडा | Updated On: 26 Apr, 2026 | 05:43 PM

Dairy Farming Tips: कई राज्यों में इस समय गेहूं की कटाई जोरों पर है. घर-घर नया भूसा पहुंच रहा है और पशुपालक इसे ताजा समझकर तुरंत चारे के रूप में इस्तेमाल करने लगते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, यही जल्दबाजी कई बार पशुओं की सेहत पर भारी पड़ सकती है. सही जानकारी के अभाव में दिया गया नया भूसा फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है.

क्यों नुकसानदेह हो सकता है नया भूसा?

गेहूं का ताजा भूसा काफी सख्त होता है और इसमें फाइबर व लिग्निन की मात्रा अधिक रहती है, जिसके कारण पशु इसे आसानी से पचा नहीं पाते. यदि इसे अधिक मात्रा में अकेले ही खिला दिया जाए, तो पशुओं में पेट फूलना, कब्ज, गैस बनना और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में गोबर की मात्रा भी कम होने लगती है और पशु सुस्त पड़ जाते हैं. ऐसे में ‘ताजा है, तो बेहतर है’ वाली सोच यहां नुकसानदेह साबित हो सकती है, इसलिए इसे संतुलित आहार के साथ ही देना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है.

संतुलित आहार है सबसे जरूरी

हरा चारा पाचन को आसान बनाता है और भूसे के सख्तपन को संतुलित करता है. इससे पशु आसानी से जुगाली कर पाते हैं और उनका पाचन तंत्र सही बना रहता है.

भिगोकर खिलाएं तो मिलेगा ज्यादा फायदा

नया भूसा खिलाने का सबसे असरदार तरीका यह है कि पहले उसे पानी में भिगो दिया जाए. भिगोने से भूसा नरम हो जाता है, जिससे पशु इसे आसानी से चबा और पचा पाते हैं. इसके साथ यदि इसमें थोड़ा मिनरल मिक्सचर या गुड़-पानी मिला दिया जाए, तो इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है. यह तरीका खासतौर पर दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि इससे उनकी सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

दूध उत्पादन पर पड़ता है असर

जब पशु का पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है, तो वह चारे से अधिक पोषण अवशोषित कर पाता है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर दिखाई देता है. संतुलित आहार देने से न केवल दूध की मात्रा बढ़ती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है. वहीं, यदि भूसा गलत तरीके से या असंतुलित रूप में दिया जाए, तो यह पाचन को प्रभावित कर सकता है और दूध उत्पादन में गिरावट भी आ सकती है.

सही तरीका अपनाएं, नुकसान से बचें

नया भूसा पूरी तरह खराब नहीं होता, बल्कि यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह पशुओं के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है. जरूरी है कि पशुओं के आहार में संतुलन बनाए रखा जाए, जिसमें हरा चारा, सूखा चारा, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल हो. इन सभी तत्वों का सही संयोजन पशुओं की सेहत और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाता है. पशुपालन में छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़े नुकसान से बचा सकती हैं, इसलिए नया भूसा जल्दबाजी में खिलाने के बजाय उसे सही तरीके से और संतुलित आहार के साथ ही देना चाहिए.

 

Published: 26 Apr, 2026 | 08:30 PM

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