महंगा दाना छोड़िए, ये देसी फॉर्मूला अपनाइए! कम लागत में मिलेगा ज्यादा दूध और मुनाफा
पशुपालन में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से परेशान किसानों के लिए विशेषज्ञों ने आसान उपाय बताए हैं. सही हरा चारा, संतुलित आहार और बेहतर चारा प्रबंधन अपनाकर पशुओं का स्वास्थ्य सुधारा जा सकता है. इससे दूध उत्पादन बढ़ने के साथ खर्च कम करने और डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाने में मदद मिल सकती है.
Milk Production: दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन की लागत कम करने के लिए विशेषज्ञों ने पशुपालकों को कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह दी है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, खरीफ सीजन में ज्वार, बाजरा, मक्का, न्यूट्रीफीड और लोबिया जैसे हरे चारे की खेती करना फायदेमंद हो सकता है. यह चारा पोषक तत्वों से भरपूर होता है और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. इसकी पहली कटाई करीब 40 से 50 दिनों में शुरू हो जाती है, जिससे पशुपालकों को बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम पड़ती है.
ज्यादा चारा खिलाना नहीं है सही
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाना सही तरीका नहीं माना जाता. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, कई पशुपालक ज्यादा दूध की उम्मीद में जरूरत से अधिक हरा चारा दे देते हैं, जिससे लाभ की जगह नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि एक पशु को प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलो हरा चारा देना पर्याप्त होता है. इससे अधिक चारा खिलाने पर अपच, गैस और पाचन संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सीधा असर पशुओं की उत्पादकता और दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
चारा खिलाने का तरीका भी जरूरी
पशुपालकों को सिर्फ पशुओं के चारे की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसे खिलाने के तरीके पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, हरे चारे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खुरली या नाद में देना सबसे अच्छा तरीका है. कई पशुपालक चारा सीधे जमीन पर डाल देते हैं, जिससे उसमें मिट्टी, गंदगी और फंगस मिल सकती है. ऐसा चारा खाने से पशुओं में बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. साफ-सुथरे तरीके से चारा देने से पशु स्वस्थ रहते हैं, चारे की बर्बादी कम होती है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.
कम खर्च में बढ़ सकता है मुनाफा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) का कहना है कि यदि पशुपालक हरे चारे की खेती, संतुलित आहार और सही चारा प्रबंधन जैसे उपाय अपनाते हैं, तो दूध उत्पादन की लागत में अच्छी कमी लाई जा सकती है. स्वस्थ पशु अधिक दूध देते हैं और उनके इलाज पर होने वाला खर्च भी कम होता है. ऐसे में पशुपालकों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.