सिर्फ 8 दिनों में तैयार होगा पौष्टिक हरा चारा, राज्यपाल ने शुरू की आधुनिक हाइड्रोपोनिक यूनिट

लखनऊ में शुरू हुई हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन यूनिट अब कम पानी और कम जगह में पौष्टिक हरा चारा तैयार करेगी. इस आधुनिक तकनीक से गौवंशों को पूरे साल रसायन मुक्त चारा मिलेगा. 8 दिनों में तैयार होने वाली यह प्रणाली पशुपालकों के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जा रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 29 May, 2026 | 09:34 PM

Hydroponic Fodder: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन में स्थापित हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन यूनिट का उद्घाटन किया. इस आधुनिक यूनिट का उद्देश्य जन भवन गौशाला में मौजूद गौवंशों को पूरे साल पौष्टिक, ताजा और रसायन मुक्त हरा चारा उपलब्ध कराना है. राज्यपाल ने इस पहल को गौसंरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया.

राज्यपाल की प्रेरणा से शुरू की गई यह यूनिट कम पानी, कम जगह और कम समय में अधिक मात्रा में हरा चारा तैयार करने में सक्षम है. अधिकारियों के अनुसार यह प्रणाली आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है, जिससे हर मौसम में लगातार हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकेगा.

क्या होती है हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन यूनिट?

हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन  यूनिट ऐसी तकनीक है, जिसमें मिट्टी के बिना हरा चारा उगाया जाता है. इसमें मक्का, जौं, जई और गेहूं जैसे बीजों को विशेष ट्रे में रखकर नियंत्रित तापमान और नमी के बीच तैयार किया जाता है. लगभग 7 से 8 दिनों में बीज अंकुरित होकर पौष्टिक हरे चारे में बदल जाते हैं. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता. इससे तैयार चारा पूरी तरह सुरक्षित और पोषण से भरपूर माना जाता है. जन भवन में लगी यूनिट प्रतिदिन करीब 100 किलोग्राम हरा चारा उत्पादन करने की क्षमता रखती है.

कैसे काम करती है ये आधुनिक तकनीक?

हाइड्रोपोनिक प्रणाली पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में काम करती है. सबसे पहले बीजों को साफ कर कुछ घंटों तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद उन्हें ट्रे में रखा जाता है, जहां नियमित रूप से पानी की हल्की फुहार दी जाती है. कुछ दिनों में बीज अंकुरित  होकर घने हरे चारे का रूप ले लेते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है. पारंपरिक खेती की तुलना में यह तकनीक लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक पानी बचाने में मदद करती है.

पशुपालकों के लिए क्यों फायदेमंद है यह यूनिट?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोपोनिक चारा पशुओं के स्वास्थ्य  के लिए काफी लाभकारी होता है. इससे पशुओं की पाचन क्षमता बेहतर होती है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जाती है. कम जगह में ज्यादा चारा उत्पादन होने से छोटे और मध्यम पशुपालकों को काफी राहत मिल सकती है. सूखे या चारे की कमी वाले इलाकों में यह तकनीक पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. इसके साथ ही रसायन मुक्त चारा मिलने से पशुओं में बीमारियों का खतरा भी कम होता है.

गौसंरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों  का उपयोग करके गौसेवा को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन प्रणाली कम पानी, कम जगह और कम समय में पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम है. ये तकनीक जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ सतत कृषि व्यवस्था को भी मजबूत करेगी.

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Published: 29 May, 2026 | 09:34 PM

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