दलहन किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के साथ ही दलहन फसलों की जल्दी बिक्री और पैकेजिंग के लिए देशभर में 153 नई दाल मिलें खोलने का ऐलान किया गया है. यह दाल मिलें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, गोवा समेत अन्य राज्यों में स्थापित की जाएंगी और इन दाल मिलों पर होने वाले खर्च के लिए पहले चरण में 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मंंजूर की गई है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन उत्पादन और खेती के रकबे में बढ़ोत्तरी हुई है. दलहन के क्षेत्रे में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में किसानों के योगदान से मजबूत कदम बढ़ाया जा रहा है.
तिलहन उत्पादन दोगुना करने के लिए एक हजार करोड़ खर्च होंगे
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में रीजनल कृषि कांफ्रेंस के बाद प्रेसवार्ता में बताया कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके. उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 290 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 330 लाख हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 390.02 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 697 लाख मीट्रिक टन तक ले जाया जाए, ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले.
दलहन उत्पादन के हॉटस्पॉट बनेंगे राज्य
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दलहन उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात मिलकर देश के कुल उत्पादन का 60 फीसदी से अधिक योगदान देते हैं और इन राज्यों के कई जिले- जैसे मध्य प्रदेश में नर्मदापुरम, राजस्थान में झालावाड़ व टोंक, महाराष्ट्र में गढ़चिरौली और गुजरात में जूनागढ़ बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें मॉडल जिलों के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन जिलों में दलहन उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, वहाँ की समीक्षा कर उत्पादकता में वृद्धि के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी.
देशभर में 153 दाल मिलें लगेंगी, राज्यों के लिए राशि मंजूर
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन प्रोसेसिंग को गति देने के लिए दाल मिलों का बड़ा नेटवर्क विकसित किया जा रहा है. मध्य प्रदेश में 55, महाराष्ट्र में 34, गुजरात में 28, राजस्थान में 30 और गोवा में 5 दाल मिलों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, ताकि उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी हो सके. उन्होंने कहा कि वर्ष 2026–27 के लिए मध्य प्रदेश को 344 करोड़ रुपये, राजस्थान को 312 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 166 करोड़ रुपये और गुजरात को 31 करोड़ रुपये दलहन मिशन के तहत उपलब्ध कराए जाएंगे और तुर, उड़द, मसूर जैसी दालों में इच्छुक किसानों की 100 प्रतिशत उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का प्रावधान रखा गया है, जिससे किसानों को गेहूं-चावल की तरह दालों में भी पूर्ण सुरक्षा का भरोसा मिल सके.
लैब टू लैंड के मॉडल पर काम करेंगे 16 हजार वैज्ञानिक
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान अब राज्यों के कृषि–मौसम और फसल चक्र के अनुसार चलाया जाएगा और लगभग 16,000 वैज्ञानिक, ICAR संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केंद्र सीधे किसानों के बीच जाकर “लैब टू लैंड” के सिद्धांत पर काम करेंगे. उन्होंने कहा कि छोटी जोतों पर आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल- अनाज के साथ फल, फूल, सब्जियां, औषधीय खेती, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, बकरी पालन और एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा दिया जाएगा और प्राकृतिक खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के जरिए किसानों को प्रीमियम बाजार दिलाने पर सहमति बनी है.