पशुपालकों के लिए खुशखबरी! FMD खत्म करने को सरकार का मेगा प्लान, 140 करोड़ वैक्सीन लगेंगी
देश में फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने अभियान तेज कर दिया है. टीकाकरण, निगरानी और नई रणनीतियों के जरिए 2030 तक भारत को FMD मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे पशुधन सुरक्षित होगा और पशुपालकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.
Foot and Mouth Disease: देश के पशुधन को फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं. इसी उद्देश्य से भुवनेश्वर में एफएमडी के वर्गीकरण (Compartmentalization) और ज़ोनिंग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई. इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य 2030 तक भारत को एफएमडी मुक्त देश बनाना, पशुओं की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना और पशुधन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाना है. विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक निगरानी, नियमित टीकाकरण और आधुनिक तकनीक के जरिए इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
2030 तक FMD मुक्त भारत बनाने पर सरकार का जोर
कार्यशाला में सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2030 तक भारत को फुट एंड माउथ डिजीज मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके लिए पूरे देश में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. पशुओं की पहचान के लिए कान में टैग लगाए जा रहे हैं और उनकी डिजिटल निगरानी की जा रही है, जिससे बीमारी फैलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. सरकार के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अब तक 1.4 अरब (140 करोड़) से अधिक एफएमडी वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है. लगातार टीकाकरण का असर भी दिख रहा है. 2022 में जहां एनएसपी पॉजिटिविटी दर 16.6 प्रतिशत थी, वहीं 2026 में यह घटकर 7.8 प्रतिशत रह गई है.
जोनिंग और निगरानी से बीमारी पर लगेगी रोक
एफएमडी (FMD) को पूरी तरह खत्म करने के लिए अब जोनिंग और कंपार्टमेंटलाइजेशन की रणनीति अपनाई जा रही है. इसके तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में है और वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी. सरकार ने बताया कि इस अभियान के लिए नौ राज्यों को प्राथमिकता दी गई है. मजबूत निगरानी, जैव सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए पशुओं को संक्रमण से बचाने की योजना बनाई गई है. इससे पशुधन की सुरक्षा के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा.
FMD नियंत्रण में डिजिटल तकनीक निभाएगी बड़ी भूमिका
कार्यशाला के दौरान पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई नई डिजिटल सुविधाएं भी शुरू की गईं. इनमें रेट माई लेबोरेटरी ऐप, डेयरी विकास पोर्टल, विद्यापीठ पोर्टल और मैस्टाइटिस रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) शामिल हैं. इन डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से पशु चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी, डेयरी ढांचे की निगरानी आसान होगी और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी. इससे पशुओं की बीमारी का समय पर पता लगाना और इलाज करना भी आसान होगा.
किसानों और पशुपालकों को मिलेगा सीधा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि एफएमडी पर प्रभावी नियंत्रण होने से पशुओं की सेहत बेहतर होगी, दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुधन की उत्पादकता में सुधार आएगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. कार्यशाला में यह भी बताया गया कि पिछले तीन वर्षों में एशिया-1 सीरोटाइप का कोई नया मामला सामने नहीं आया है और देश में हर साल 116 करोड़ एफएमडी वैक्सीन तैयार करने की क्षमता मौजूद है. सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयास, नियमित टीकाकरण, आधुनिक तकनीक और मजबूत पशु स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिए भारत 2030 तक एफएमडी मुक्त देश बनने के लक्ष्य को हासिल कर सकता है. इससे पशुधन सुरक्षित होगा, किसानों की आजीविका मजबूत होगी और भारत का पशुधन व्यापार भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा.