गायों के लिए 7500 गोशालाएं खुद उगाएंगी हरा चारा, किसानों को जोड़कर कमाई बढ़ाने का फॉर्मूला लागू होगा

गोशालाओं को पशु आहार केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके तहत हरा चारा उत्पादन बढ़ाया जाएगा और किसानों को इससे जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. इस पहल से पशुओं को बेहतर पोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 9 Feb, 2026 | 12:41 PM

Uttar Pradesh Cow Shelters:  गांवों की गोशालाएं अब सिर्फ पशुओं के रहने की जगह नहीं रहेंगी, बल्कि चारे के उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने का नया केंद्र बनने जा रही हैं. जब खेतों में हरा चारा उगेगा और गोशालाओं तक सीधे पहुंचेगा, तो पशुओं को बेहतर पोषण मिलेगा और किसानों की कमाई भी बढ़ेगी. उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल पशुपालन और खेती को एक साथ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

गोशालाओं को मिलेगा हरा चारा उगाने का जिम्मा

उत्तर प्रदेश की लगभग 7500 गोशालाओं को अब पशु आहार केंद्र  के रूप में विकसित किया जाएगा. इसका उद्देश्य गोवंश को सालभर पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना है. गोशालाओं के पास उपलब्ध जमीन का उपयोग चारा उत्पादन के लिए किया जाएगा, ताकि पशुओं को पोषण की कमी न हो. इससे गोशालाओं की व्यवस्था भी मजबूत होगी और पशुओं की सेहत में सुधार देखने को मिलेगा.

50 से 100 किसानों का बनेगा नेटवर्क

इस योजना के तहत हर गोशाला को आसपास के 50 से 100 किसानों से जोड़ा जाएगा. यह नेटवर्क चारा उत्पादन, उसकी आपूर्ति और विपणन की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाएगा. इससे किसानों को चारा बेचने के लिए एक तय बाजार मिलेगा और उन्हें उचित मूल्य भी मिल सकेगा. नियमित मांग होने से किसान चारा उत्पादन को एक अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में अपना सकेंगे.

गोशालाओं को पशु आहार केंद्र बनाकर आय बढ़ाने की योजना.

कई तरह के चारे की होगी खेती

गोशालाओं और आसपास के क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक चारे उगाए जाएंगे. इसमें मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास  जैसे पोषण से भरपूर पौधों का रोपण किया जाएगा. इसके अलावा गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा, लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम जैसे मौसमी चारे की खेती भी होगी. इससे पूरे साल पशुओं के लिए हरा और संतुलित भोजन उपलब्ध रहेगा और चारे की कमी की समस्या कम होगी.

किसानों की आय और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती

गोशालाओं को पशु आहार केंद्र बनाने से पशुपालन को बड़ा फायदा  मिलने की उम्मीद है. बेहतर चारा मिलने से पशुओं का स्वास्थ्य सुधरेगा और दूध उत्पादन बढ़ सकता है. दूसरी ओर, किसानों को चारा उत्पादन से अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा. इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. यह पहल खेती और पशुपालन को जोड़कर आत्मनिर्भर गांव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. अगर योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों को मिलेगा.

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