50 रुपये की तकनीक ने बदली गुजरात में पशुपालन की तस्वीर, बछियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा

सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का इस्तेमाल गुजरात में 2022-23 से शुरू हो चुका था, लेकिन शुरुआती दो वर्षों में इसका दायरा सीमित ही रहा. उस समय एक डोज की कीमत करीब 300 रुपये थी, जिसे कई छोटे और मध्यम किसान महंगा मानते थे. साल 2024 में गुजरात सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसकी कीमत घटाकर सिर्फ 50 रुपये कर दी.

नई दिल्ली | Published: 22 Dec, 2025 | 09:51 AM

गुजरात में पशुपालन के क्षेत्र में बीते एक साल के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है. राज्य सरकार के एक फैसले ने न सिर्फ किसानों की सोच बदली है, बल्कि डेयरी सेक्टर को भी नई दिशा दी है. बात हो रही है सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक की, जिसके इस्तेमाल में गुजरात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार द्वारा इसकी कीमत घटाए जाने के बाद अब किसान तेजी से इस तकनीक को अपना रहे हैं और इसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं.

कीमत घटते ही बदली किसानों की रुचि

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का इस्तेमाल गुजरात में 2022-23 से शुरू हो चुका था, लेकिन शुरुआती दो वर्षों में इसका दायरा सीमित ही रहा. उस समय एक डोज की कीमत करीब 300 रुपये थी, जिसे कई छोटे और मध्यम किसान महंगा मानते थे. साल 2024 में गुजरात सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसकी कीमत घटाकर सिर्फ 50 रुपये कर दी. यही फैसला इस तकनीक के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

कीमत कम होते ही किसानों का भरोसा बढ़ा और एक ही साल में इसका उपयोग लगभग पांच गुना बढ़ गया. जहां पहले सालाना करीब 25 हजार पशुओं को ही यह डोज दी जाती थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर एक लाख 30 हजार से ज्यादा तक पहुंच गया.

इस साल भी बना हुआ है रुझान

पिछले साल की सफलता के बाद मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. अब तक एक लाख से अधिक पशुओं को सेक्स-सॉर्टेड सीमेन दी जा चुकी है. इससे साफ है कि किसान इस तकनीक को अपनाने में अब हिचक नहीं रहे हैं. उन्हें इसका सीधा फायदा दिख रहा है, खासकर बछियों के जन्म की संख्या बढ़ने के रूप में.

94 प्रतिशत तक मादा बछियों का जन्म

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे जन्म लेने वाले बछड़ों में करीब 94 प्रतिशत मादा होती हैं. डेयरी आधारित राज्यों में मादा पशु दूध उत्पादन और झुंड बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं. वहीं नर बछड़ों की आर्थिक उपयोगिता सीमित होती है, जिससे कई बार आवारा पशुओं की समस्या भी खड़ी हो जाती है. इस लिहाज से यह तकनीक दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आवारा पशुओं की समस्या को कम करने में भी मददगार साबित हो रही है.

देश में बढ़ रहा है उत्पादन

देशभर में भी सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. फिलहाल भारत में सरकारी और निजी स्तर पर कुल आठ सीमेन स्टेशन इस तकनीक से जुड़े हुए हैं. अब तक देश में करीब 128 लाख डोज तैयार की जा चुकी हैं. तकनीक को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए स्वदेशी मशीनों पर भी काम किया गया है, जिससे आने वाले समय में और ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें.

डेयरी सेक्टर के लिए बड़ी उम्मीद

गुजरात का अनुभव बताता है कि अगर सही नीति और कीमत का संतुलन बनाया जाए, तो आधुनिक तकनीकें तेजी से जमीन पर उतर सकती हैं. सेक्स-सॉर्टेड सीमेन न केवल किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि राज्य के डेयरी सेक्टर को भी मजबूत बना रही है. आने वाले वर्षों में इसके और व्यापक असर देखने को मिलने की उम्मीद है.

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