हरियाणा में ‘ग्रामीण हाट मंडी’शुरू करेगी सरकार, बागवानी फसलों के नुकसान पर मिलेंगे 50000 रुपये
सोनीपत, पानीपत, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इसके अलावा, 4 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले नए एफपीओ मिशन के तहत राज्य के 775 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत किया जाएगा.
Agriculture News: हरियाणा के किसान अब अपनी उपज को मंडी में सीधे बेच पाएंगे. अब उपज बेचने के लिए किसानों को बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि हरियाणा सरकार ने किसानों की मंडी तक पहुंच आसान बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड राज्यभर में ‘ग्रामीण हाट मंडी’ स्थापित करेगा, जिन्हें किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के पैक हाउस से जोड़ा जाएगा. खास बात यह है कि पहली ग्रामीण हाट मंडी 23 दिसंबर को किसान दिवस के मौके पर शुरू की जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से किसानों को फायदा होगा. उनकी कमाई में बढ़ोतरी होगी. वहीं, प्राकृतिक आपदा से फलों की फसल को होने वाले नुकसान पर मुआवजा 50,000 रुपये प्रति एकड़ दिया जाएगा.
दरअसल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए ये घोषणाएं कीं. खास बात यह है कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने बागवानी विभाग का पुनर्गठन कर उसका नाम ‘हॉर्टिकल्चर एंड मार्केटिंग डिपार्टमेंट’ रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि उत्पादन, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग को एक साथ जोड़ा जा सके. बागवानी फसलों के लिए एमएफएमबी पोर्टल पूरे साल चालू रहेगा और भंडारण मजबूत करने व निर्यात बढ़ाने के लिए नई कोल्ड चेन नीति लागू की जाएगी.
फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा
इस बार के बजट में प्राकृतिक आपदा से फलों की फसल को होने वाले नुकसान पर मुआवजा 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति एकड़ किया जाएगा. वहीं सब्जियों और मसालों के लिए यह राशि 30,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है. सबसे बड़ी बात यह है कि हरियाणा सरकार ‘हरियाणा पोटैटो सीड एक्ट’ लाने जा रही है, जिसके तहत टिश्यू कल्चर आधारित आलू बीज लाइनों का प्रमाणन किया जाएगा. इससे हर साल करीब 7.5 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाला बीज तैयार करने में मदद मिलेगी. घरौंडा और सिरसा की लैब में कीटनाशक अवशेष जांच की क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 5,000 सैंपल प्रति वर्ष की जाएगी. साथ ही नेमाटोड (सूक्ष्म कीट) जांच के लिए नई लैब भी स्थापित की जाएंगी.
इन जिलों में मशरूम की खेती को मिलेगा बढ़ावा
वहीं, सोनीपत, पानीपत, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इसके अलावा, 4 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले नए एफपीओ मिशन के तहत राज्य के 775 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत किया जाएगा. हरियाणा सरकार ने मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं. मछली पालकों के लिए यमुनानगर, रोहतक और फरीदाबाद में 9 करोड़ रुपये की लागत से नई मिट्टी और पानी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी. वहीं ज्योतिसर और सांपला स्थित सरकारी फिश सीड फार्म को 20 करोड़ रुपये से आधुनिक बनाया जाएगा.
100 करोड़ रुपये की लागत से दो आधुनिक मछली बाजार बनाए जाएंगे
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिसार और फरीदाबाद में 100 करोड़ रुपये की लागत से दो आधुनिक मछली बाजार बनाए जाएंगे. साथ ही करनाल में 50 करोड़ रुपये की लागत से फिश प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी. इसके अलावा, ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत हिसार में बहुउद्देश्यीय पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा, जहां पशुपालकों को जानवरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम और बेहतर प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएगी.
हरियाणा सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई नई घोषणाएं की हैं. राज्य में सात नए पशु औषधालय और चार नए पशु अस्पताल खोले जाएंगे. इसके साथ ही 20 नई मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां शुरू की जाएंगी, ताकि हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक मोबाइल यूनिट उपलब्ध हो सके. अभी राज्य में 70 मोबाइल यूनिट पहले से काम कर रही हैं. सभी पशुपालन संस्थानों का चरणबद्ध तरीके से 15 करोड़ रुपये की लागत से कंप्यूटरीकरण किया जाएगा.
डेयरी फार्म के लिए 10 करोड़ रुपये की नई योजना शुरू करने की घोषणा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 100 पशुओं तक की आधुनिक डेयरी फार्म के लिए 10 करोड़ रुपये की नई योजना शुरू करने की घोषणा की है. साथ ही हिसार में 30 करोड़ रुपये की लागत से हरियाणा वेटरनरी एपिडेमियोलॉजी सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण में मदद करेगा.