गर्मी में पशुओं को कब खिलाएं चारा? बढ़ती गर्मी और लू से बचाने के लिए विभाग ने जारी की एडवाइजरी

Heat Stress In Livestock: बिहार पशुपालन विभाग ने बढ़ती गर्मी और लू से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालकों को सलाह दी है. विभाग ने दोपहर में भारी चारा न देने, सुबह या रात में भोजन कराने, पर्याप्त पानी और छायादार स्थान की व्यवस्था करने पर जोर दिया है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और उत्पादन प्रभावित न हो.

नोएडा | Updated On: 30 May, 2026 | 08:51 PM

Heatwave Advisory for Farmers: गर्मी का मौसम केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है. तापमान बढ़ने के साथ-साथ पशुओं में हीट स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की देखभाल में खास सावधानी बरतें और उन्हें गर्मी तथा लू के प्रभाव से बचाने के लिए उचित प्रबंधन अपनाएं.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने भी पशुपालकों को बढ़ती गर्मी के दौरान पशुओं की सुरक्षा को लेकर जरूरी सलाह जारी की है. विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता पशुओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है.

गर्मी में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

गर्मी के दिनों में तेज धूप और लू के कारण पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. अगर समय रहते उचित देखभाल न की जाए, तो पशुओं में भूख कम लगना, सुस्ती, दूध उत्पादन में गिरावट और स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. दूध देने वाले पशुओं पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. अधिक तापमान की वजह से उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है और इससे पशुपालकों की आय पर भी असर पड़ सकता है.

चारा खिलाने का सही समय

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में पशुओं को दोपहर के समय भारी भोजन या चारा देने से बचना चाहिए. इस समय तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे पशुओं को भोजन पचाने में परेशानी हो सकती है. पशुओं को चारा सुबह के ठंडे समय या फिर शाम और रात के समय खिलाना अधिक लाभकारी माना जाता है. इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है और पशु आराम से भोजन कर पाते हैं. इससे उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उत्पादन क्षमता भी प्रभावित नहीं होती.

स्वच्छ और ठंडे पानी की करें व्यवस्था

गर्मी में पशुओं के शरीर में पानी की आवश्यकता सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बढ़ जाती है. इसलिए पशुपालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पशुओं को हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध हो. पानी की कमी से पशुओं में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. दिन में कई बार पानी की जांच करना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना भी जरूरी है.

छाया और ठंडी जगह का करें प्रबंध

गर्मी और लू से बचाव के लिए पशुओं को छायादार स्थान पर रखना चाहिए. यदि संभव हो तो पशुशाला में हवा के उचित आवागमन की व्यवस्था करें. टीन या एस्बेस्टस की छत वाले शेड में तापमान अधिक बढ़ सकता है, इसलिए वहां अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है. पशुशाला के आसपास पानी का छिड़काव करने या हरे जाल (ग्रीन नेट) का उपयोग करने से भी तापमान कम रखने में मदद मिल सकती है.

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में पशुओं की दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करें. चारा और पानी की सही व्यवस्था, छाया का प्रबंध और दोपहर की तेज धूप से बचाव जैसे छोटे कदम पशुओं को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

Published: 31 May, 2026 | 06:00 AM

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