IVF के इस्तेमाल से जन्म लेंगे उन्नत नस्ल के पशु, देसी गौवंश नस्ल सुधार और संरक्षण के लिए सेंटर खुला
उत्तर प्रदेश के मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए बरेली में बीएल कामधेनु परिसर में स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स के लिए इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया. करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह एकीकृत परिसर स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक उन्नयन के उद्देश्य से स्थापित किया गया है.
पशुओं में बढ़ती बांझपन की समस्या और गर्भधारण में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए आईवीएफ तकनीक (In Vitro Fertilization (IVF)) का इस्तेमाल शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण कुमार ने बरेली जिले में स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स के इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया है. उन्होंने कहा कि इस सेंटर में दी जा रहीं तकनीकों की मदद से पशुओं की देसी नस्लों को संरक्षित करने और बेहतर नस्ल तैयार करने में मददगार साबित होगा. उन्होंने कहा कि तकनीक से पशुधन, जैव विविधता, जैविक कृषि, ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत कर टिकाऊ ग्रामीण विकास की को बढ़ावा मिलेगा.
उत्तर प्रदेश के मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए बरेली में बीएल कामधेनु परिसर में स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स के लिए इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया. करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह एकीकृत परिसर स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक उन्नयन के उद्देश्य से स्थापित किया गया है.
मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि यह सेंटर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समग्र विकास दृष्टिकोण से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि इस मॉडल में पशुधन, जैव विविधता, जैविक कृषि, ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत कर टिकाऊ ग्रामीण विकास को साकार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक राज्य है और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों तथा उन्नत जीनोमिक अनुसंधान के जरिए राज्य उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में भी योगदान दे सकता है.
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नस्ल सुधार और संरक्षण से किसानों की कमाई बढ़ेगी
उन्होंने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत एवं ग्रामीण समृद्धि की दिशा में सशक्त पहल बताते हुए कहा कि आधुनिक आनुवंशिक तकनीकों से नस्ल सुधार, नस्ल संरक्षण में मदद मिलेगी और इससे किसानों की आय में वृद्धि, पशुधन की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार तथा दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी. इस स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स के लिए इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेंटर में उन्नत इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर (आईवीएफ–ईटी) प्रयोगशाला, आधुनिक पैथोलॉजी परीक्षण प्रयोगशाला तथा जीनोमिक विश्लेषण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
पशुओं के रोगों की सटीक पहचान होगी
पैथोलॉजी प्रयोगशाला के जरिए पशुओं में बांझपन, गर्भधारण में दिक्कत समेत अन्य रोगों की शीघ्र और सटीक पहचान हो सकेगी. इससे जैव सुरक्षा मजबूत होगी और पशुधन की उत्पादकता में बढ़त होगी. जीनोमिक प्रयोगशाला नस्ल सुधार, श्रेष्ठ पशुओं की पहचान तथा वैज्ञानिक, डेटा-आधारित प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा देगी. वहीं आईवीएफ–ईटी तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के नियंत्रित एवं तीव्र संवर्धन को गति मिलेगी. इस पहल को दोनों देशों के बीच पशु आनुवंशिकी और डेयरी विकास के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है.
भारतीय पशुपालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम – घनश्याम खंडेलवाल
बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि यह तकनीकी केंद्र भारतीय पशुपालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारत और ब्राजील के बीच गहरे और सुदृढ़ संबंधों की आधारशिला पर बना है. यह केंद्र 25 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें नई पीढ़ी के पशु विज्ञान के तीन प्रमुख स्तंभ—रोग निदान (पैथोलॉजी), जीनोमिक्स तथा उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी—को एक ही छत के नीचे लाया गया है. यह व्यवस्था पशुधन क्षेत्र के टिकाऊ और दीर्घकालिक विकास की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा.