बारिश में बछड़े जल्दी पड़ते हैं बीमार! पशु चिकित्सक ने बताए आसान उपाय, ऐसे करें बचाव
मानसून में नमी और गंदगी के कारण नवजात बछड़ों में संक्रमण, दस्त और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है. पशु चिकित्सक ने बछड़ों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान और जरूरी उपाय बताए हैं. सही देखभाल, समय पर टीकाकरण और संतुलित आहार अपनाकर पशुपालक बड़े नुकसान से बच सकते हैं.
Calf Care Tips: बारिश का मौसम जहां पशुओं के लिए गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह नवजात बछड़ों के लिए कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है. लगातार नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण बछड़ों में संक्रमण, दस्त, निमोनिया और तेज बुखार जैसी समस्याएं तेजी से फैल सकती हैं. यदि समय पर सही देखभाल नहीं की जाए तो उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, मानसून के दौरान पशुपालकों को बछड़ों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि बीमारी और आर्थिक नुकसान दोनों से बचा जा सके.
जन्म के तुरंत बाद खीस पिलाना है सबसे जरूरी
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, नवजात बछड़े को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला गाढ़ा दूध यानी खीस (Colostrum) जरूर पिलाना चाहिए. यह दूध रोग प्रतिरोधक तत्वों और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो बछड़े की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है. जन्म के पहले दो से तीन घंटे के भीतर खीस पिलाने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है और बछड़ा स्वस्थ तरीके से विकास करता है. शुरुआती दिनों में सही पोषण मिलने से भविष्य में कई बीमारियों से बचाव संभव होता है.
साफ और सूखी जगह पर रखें, कीचड़ से करें बचाव
मानसून में बछड़ों को हमेशा साफ, सूखी और हवादार जगह पर रखना चाहिए. जहां पानी जमा हो या कीचड़ हो, वहां उन्हें नहीं बांधना चाहिए. बिछावन के लिए सूखा भूसा या पुआल इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर बदलते रहें. यदि बछड़ा बारिश में भीग जाए तो उसे तुरंत सूखे कपड़े से पोंछकर गर्म और सुरक्षित स्थान पर रखें. साफ-सफाई बनाए रखने से संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस का खतरा काफी कम हो जाता है. पशुपालकों को पशुशाला की नियमित सफाई और पानी की निकासी पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए.
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टीकाकरण, संतुलित आहार और समय पर इलाज है जरूरी
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम का कहना है कि बछड़ों को हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना चाहिए तथा उनकी उम्र के अनुसार संतुलित आहार देना चाहिए. यदि बछड़े में दस्त, तेज बुखार, खांसी, सुस्ती या दूध पीना बंद करने जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर उपचार से गंभीर बीमारी और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है. इसके साथ ही नियमित टीकाकरण और कृमिनाशक दवा भी जरूरी है. डॉक्टर की सलाह पर सीमित मात्रा में हल्दी और गुड़ जैसे पारंपरिक उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए. नियमित देखभाल, पौष्टिक आहार, स्वच्छ वातावरण और समय पर चिकित्सा ही मानसून में बछड़ों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.