महंगा चारा छोड़िए! बरसात की दूब घास से मिलेगा भरपूर पोषण, दूध देने वाले पशु रहेंगे स्वस्थ
बरसात में हरे चारे की कमी से परेशान पशुपालकों के लिए दूब घास किसी वरदान से कम नहीं है. प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और फाइबर से भरपूर यह प्राकृतिक चारा पशुओं की सेहत सुधारने, पाचन मजबूत करने और दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगार माना जाता है.
बरसात के मौसम में लगातार बारिश और कई जगह जलभराव होने से पशुओं के लिए हरे चारे की कमी हो जाती है. इसका असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है. ऐसे समय में अपने आप उगने वाली दूब घास पशुपालकों के लिए एक अच्छा और कम खर्च वाला विकल्प बन सकती है. खेतों की मेड़, बगीचों, सड़क किनारे और खाली पड़ी जमीन पर आसानी से मिलने वाली यह घास कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार के साथ दूब घास को शामिल करने से पशुओं को अच्छा पोषण मिल सकता है.
प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (कृषि विज्ञान केंद्र, नोएडा) के अनुसार दूब घास में प्रोटीन, विटामिन A, B और C, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये तत्व पशुओं के शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. प्रोटीन मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी होता है, जबकि कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत रखते हैं. फाइबर की पर्याप्त मात्रा होने से पाचन तंत्र भी बेहतर रहता है. यदि पशुओं को संतुलित आहार के साथ दूब घास दी जाए तो इससे उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.
प्राकृतिक, सुरक्षित और कम खर्च वाला चारा
दूब घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्राकृतिक रूप से उगती है. इसे तैयार करने के लिए अलग से रासायनिक खाद या कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए इसे सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल चारा माना जाता है. बरसात के दौरान यह तेजी से फैलती है और आसानी से उपलब्ध हो जाती है. इससे पशुपालकों को बाजार से महंगा हरा चारा खरीदने की जरूरत कम पड़ सकती है. इस तरह यह पशुपालन की लागत घटाने में भी मददगार साबित हो सकती है.
बरसात में पशुओं के लिए क्यों है फायदेमंद?
बरसात में कई बार हरा चारा समय पर नहीं मिल पाता. ऐसे में दूब घास एक उपयोगी विकल्प बन सकती है. यह आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होती है. नियमित रूप से संतुलित मात्रा में खिलाने पर पशुओं की पाचन क्षमता बेहतर बनी रहती है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. हालांकि, पशुओं को केवल दूब घास पर निर्भर नहीं रखना चाहिए. हरे चारे, सूखे चारे, खल, दाना और मिनरल मिश्रण के साथ संतुलित आहार देना अधिक लाभदायक माना जाता है.
पर्यावरण और धार्मिक महत्व भी है खास
दूब घास केवल पशुओं के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती देती हैं और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद करती हैं. बरसात के मौसम में यह तेजी से फैलकर हरियाली बढ़ाती है. भारतीय परंपरा में दूब का धार्मिक महत्व भी है और इसे कई शुभ कार्यों तथा पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है. इस तरह दूब घास कम लागत, आसान उपलब्धता और अच्छे पोषण के कारण बरसात के मौसम में पशुपालकों के लिए एक उपयोगी हरा चारा साबित हो सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नए चारे को पशुओं के आहार में शामिल करते समय उसकी मात्रा संतुलित रखें और आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह जरूर लें.