बारिश में पशुओं पर मंडराया ‘गला घोंटू’ का खतरा! एक लापरवाही पड़ सकती है भारी

बारिश में पशुओं के लिए गला घोंटू बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. गले में सूजन, तेज बुखार, खाना-पीना छोड़ना और सांस लेते समय घर्र-घर्र की आवाज इसके संकेत हैं. ऐसे लक्षण दिखें तो पशु को अलग करें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

नोएडा | Updated On: 9 Aug, 2026 | 08:22 PM

बारिश का मौसम जहां खेतों और फसलों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं पशुपालकों के लिए कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है. इस मौसम में बकरी के आसपास नमी और गंदगी बढ़ने से कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं में एक गंभीर बीमारी गला घोंटू भी है. खासकर भैंसों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर पशु की हालत तेजी से बिगड़ सकती है. इसलिए पशुपालकों को इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है. बकरी अनुसंधान संस्थान के पशु विशेषज्ञ डॉ. वाई. के. सोनी के अनुसार, गला घोंटू एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है. यह बीमारी केवल भैंसों तक सीमित नहीं है, बल्कि गाय समेत अन्य पशुओं को भी प्रभावित कर सकती है. बारिश के मौसम में पशुओं की साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण पर विशेष ध्यान देकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है.

गले में सूजन और घर्र-घर्र की आवाज को न करें नजरअंदाज

गला घोंटू बीमारी  में पशु के गले और आसपास के हिस्से में सूजन आने लगती है. इसके कारण उसे सांस लेने में परेशानी हो सकती है. कई मामलों में सांस लेते समय गले से घर्र-घर्र जैसी आवाज सुनाई देती है. बीमारी बढ़ने पर पशु बेचैन दिखाई दे सकता है और उसकी हालत तेजी से खराब हो सकती है. ऐसे में पशुपालक को यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी. गले में अचानक सूजन दिखाई देना इस बीमारी का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है.

तेज बुखार, खाना-पीना कम होना भी संकेत

गला घोंटू की शुरुआत में पशु को तेज बुखार  हो सकता है. इसके अलावा पशु खाना-पीना कम कर सकता है या पूरी तरह छोड़ सकता है. कई बार उसके कान लटकने लगते हैं और वह सामान्य से अधिक सुस्त नजर आता है. अगर इन लक्षणों के साथ गले में सूजन और सांस लेने में परेशानी भी दिखाई दे तो मामला गंभीर हो सकता है. ऐसे लक्षण नजर आते ही पशु को तुरंत दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए और पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

बारिश में साफ-सफाई का रखें खास ध्यान

इस बीमारी से बचाव  के लिए पशुओं के रहने की जगह को साफ और सूखा रखना बेहद जरूरी है. बारिश के दौरान फर्श या बाड़े में पानी जमा न होने दें. गोबर और गंदगी को नियमित रूप से हटाएं और पशुओं के लिए साफ पानी की व्यवस्था रखें. पशुपालकों को पशु विभाग की ओर से चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान में अपने पशुओं को समय पर टीका लगवाना चाहिए. इससे बीमारी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

लक्षण दिखें तो पशु को तुरंत करें अलग

अगर किसी पशु में तेज बुखार, गले में सूजन, घर्र-घर्र की आवाज या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई  देते हैं तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग रखें. इससे संक्रमण के फैलने का खतरा कम किया जा सकता है. पशु विशेषज्ञ के अनुसार, ऐसी स्थिति में पशुपालक खुद से कोई दवा या इंजेक्शन देने की कोशिश न करें. बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सक की सलाह से ही उपचार कराया जाना चाहिए. समय पर बीमारी की पहचान और उचित इलाज मिलने से पशु की हालत बिगड़ने से बचाई जा सकती है.

Published: 9 Aug, 2026 | 10:21 PM

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