पहाड़ों के याकों को मिला स्मार्ट कवच, ICAR की तकनीक बचाएगी जान और बढ़ाएगी सुरक्षा
हिमालयी क्षेत्रों में याक पालन को बेहतर बनाने के लिए ICAR-NRC on Yak ने नई स्मार्ट तकनीक विकसित की है. IoT आधारित यह सिस्टम याक की सेहत, तनाव और गतिविधियों पर नजर रखेगा. इससे पशुपालकों को समय पर जानकारी मिलेगी और याकों की सुरक्षा व बेहतर देखभाल में मदद मिलेगी.
भारत के हिमालयी क्षेत्रों में याक पालन करने वाले पशुपालकों के लिए एक बड़ी तकनीकी पहल सामने आई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRC on Yak), दिरांग ने असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी के साथ मिलकर एक खास IoT आधारित स्मार्ट याक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है. यह तकनीक याक की सेहत, व्यवहार और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी. इससे पशुपालकों को समय पर बीमारी का पता लगाने, इलाज कराने और याकों की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी.
स्मार्ट तकनीक से याक की सेहत पर रहेगी नजर
राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र के अनुसार, यह नया सिस्टम याक की वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी करने में सक्षम है. इसमें लगे IoT उपकरणों की मदद से याक की स्वास्थ्य स्थिति और गतिविधियों की जानकारी लगातार मिलती रहेगी. पहले दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में याकों की देखभाल करना काफी मुश्किल होता था. कई बार बीमारी या कमजोरी का पता देर से चलता था, जिससे पशुओं को नुकसान पहुंच सकता था. अब इस स्मार्ट सिस्टम की मदद से याक के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को समय रहते पहचाना जा सकेगा.
तनाव और बीमारी का पहले मिलेगा संकेत
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह याक में तनाव (Stress) के शुरुआती संकेतों को पहचानने में मदद करेगी. अगर किसी याक के व्यवहार या स्वास्थ्य में बदलाव आता है तो सिस्टम के जरिए अलर्ट मिल सकेगा. इससे पशुपालक और पशु चिकित्सक समय पर कदम उठा सकेंगे. शुरुआती इलाज मिलने से याकों की सेहत बेहतर होगी और उनकी उत्पादकता में भी सुधार आएगा. यह सुविधा खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी होगी जहां पशु चिकित्सा सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं.
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जियो-फेंसिंग से सुरक्षित रहेंगे याक
स्मार्ट याक मॉनिटरिंग सिस्टम में जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) सुविधा भी शामिल है. इसके जरिए याकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वे सुरक्षित चराई वाले क्षेत्रों में ही रहें. हिमालयी क्षेत्रों में कई बार याक दूर तक चले जाते हैं, जिससे उनके भटकने का खतरा रहता है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में यह तकनीक याकों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगी. इसके अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों में याकों की लोकेशन का पता लगाना भी आसान होगा.
पशुपालकों की मेहनत और खर्च होगा कम
ICAR-NRC on Yak के अनुसार, यह तकनीक याक पालकों के लिए समय और मेहनत दोनों बचाने वाली साबित होगी. पहले हर याक की निगरानी के लिए काफी समय और श्रम की जरूरत होती थी, लेकिन अब स्मार्ट सिस्टम के जरिए यह काम आसान हो जाएगा. यह तकनीक भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ याक पालन (Sustainable Yak Husbandry) को बढ़ावा देगी. इससे पशुपालकों की आजीविका मजबूत होगी और याकों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी. राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRC on Yak) और असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी की यह पहल पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.