बरसात में नहीं होगी हरे चारे की कमी! जून में लगा लें यह खास घास, 4 साल तक मिलेगा फायदा.. बढ़ेगा दूध उत्पादन

Napier Grass Farming: बरसात के मौसम में हरे चारे की कमी से बचने के लिए नेपियर घास की खेती एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. इसे एक बार लगाने पर 3-4 साल तक हरा चारा मिलता रहता है. यह घास 30 दिनों में तैयार हो जाती है और हर 20-25 दिन में इसकी कटाई की जा सकती है.

नोएडा | Updated On: 3 Jun, 2026 | 07:34 PM

Green Fodder for Cattle: बरसात का मौसम आने वाला है और इसके साथ ही पशुपालकों की चिंता भी बढ़ जाती है. बारिश के दिनों में हरे चारे की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में अगर किसान समय रहते सही योजना बना लें, तो उन्हें पूरे मौसम में चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार नेपियर घास (Napier Grass) हरे चारे के लिए सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है, जो कम लागत में लंबे समय तक पशुओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराती है.

बरसात से पहले क्यों जरूरी है तैयारी?

मानसून के दौरान कई बार खेतों में पानी भर जाता है या चारे की अन्य फसलें खराब हो जाती हैं. ऐसे में पशुओं के लिए हरा चारा जुटाना मुश्किल हो जाता है. अगर पहले से ही चारे की व्यवस्था कर ली जाए, तो पशुओं के खान-पान पर कोई असर नहीं पड़ता और दूध उत्पादन भी सामान्य बना रहता है.

नेपियर घास बनी किसानों की पहली पसंद

नेपियर घास दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद चारा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद किसान लगातार तीन से चार साल तक इससे हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं. बार-बार बुवाई करने या खेत तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है.

यही वजह है कि हाल के सालों में बड़ी संख्या में पशुपालक इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. खासकर जून का महीना इसकी बुवाई के लिए बेस्ट माना जाता है, क्योंकि इस समय मिट्टी में नमी और मौसम दोनों इसके विकास के लिए अनुकूल रहते हैं.

सिर्फ 30 दिन में तैयार हो जाती है फसल

नेपियर घास की एक और बड़ी विशेषता इसकी तेज बढ़वार है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बुवाई के करीब 30 दिन बाद इसकी पहली कटाई की जा सकती है. यदि किसान जून में इसकी खेती शुरू कर दें, तो मानसून के दौरान उनके पास पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध रहता है. यह घास कटाई के बाद भी तेजी से दोबारा बढ़ती है, इसलिए पूरे साल पशुओं के लिए चारे की नियमित व्यवस्था बनी रहती है.

पौष्टिकता से भरपूर है यह चारा

नेपियर घास केवल मात्रा में ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता में भी काफी अच्छी मानी जाती है. इसमें लगभग 7 से 12 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो पशुओं की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. नियमित रूप से यह घास खिलाने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. साथ ही कई मामलों में दूध उत्पादन में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी देखी गई है. यही कारण है कि डेयरी व्यवसाय करने वाले किसान इसे काफी लाभदायक मानते हैं.

खेती करते समय इन बातों का रखें ध्यान

नेपियर घास की खेती लगभग हर प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. अधिक जलभराव पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए ऐसी जमीन का चयन करना बेहतर होता है जहां पानी आसानी से निकल सके. इसके अलावा हर कटाई के बाद हल्की सिंचाई करने से घास तेजी से दोबारा बढ़ती है और उत्पादन लंबे समय तक बना रहता है.

हर 20-25 दिन में कर सकते हैं कटाई

विशेषज्ञों के अनुसार, नेपियर घास की कटाई हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर की जा सकती है. नियमित कटाई करने से नई घास तेजी से निकलती रहती है और हरे चारे की लगातार उपलब्धता बनी रहती है.

Published: 4 Jun, 2026 | 06:00 AM

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