नेपाल की बाढ़ में बहा हाथियों का कुनबा, UP में ऐसे बची 5 बेजुबान जिंदगियां!
नेपाल की भीषण बाढ़ में कौड़ियाला नदी का तेज बहाव पांच हाथियों के लिए जानलेवा बन गया. बहते-बहते हाथियों का कुनबा गिरजापुरी बैराज पहुंचा. वन और सिंचाई विभाग ने तुरंत गेट बंद कर पानी का बहाव घटाया. आखिरकार सभी हाथी सुरक्षित जंगल लौट गए.
Elephant Rescue: नेपाल की भीषण बाढ़ का असर अब सीमावर्ती इलाकों में इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी दिखाई दे रहा है. बहराइच में कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहकर 5 हाथी गिरजा बैराज तक पहुंच गए. जिंदगी और मौत के बीच फंसे इस कुनबे के लिए कुछ पल बेहद खतरनाक थे, लेकिन वन विभाग और सिंचाई विभाग की त्वरित कार्रवाई ने बड़ा हादसा टाल दिया. बैराज के गेट बंद कर पानी का बहाव कम किया गया और आखिरकार तीन वयस्क हाथियों समेत दो छोटे हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेज दिया गया.
नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई वन्यजीवों की मुश्किल
नेपाल इस समय भीषण बाढ़ और तबाही से जूझ रहा है. भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है. 26 अगस्त की शाम तक नेपाल में करीब 94 लोगों की मौत की खबर सामने आई थी. इसका असर नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के इलाकों में भी देखने को मिल रहा है, जहां कई नदियां उफान पर हैं. इसी दौरान बहराइच के जंगलों से एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. नेपाल की तरफ से आया हाथियों का एक कुनबा कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में फंस गया और बहते-बहते चौधरी चरण सिंह गिरजापुरी बैराज के पास पहुंच गया.
तेज धार में जिंदगी बचाने के लिए जूझते रहे हाथी
बताया जा रहा है कि हाथियों का झुंड जंगल में विचरण कर रहा था. इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और तेज बहाव ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. पानी की धार इतनी तेज थी कि हाथियों के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो गया. तीन बड़े और दो छोटे हाथी काफी देर तक पानी के बीच अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. जैसे-जैसे बहाव उन्हें बैराज की तरफ खींच रहा था, खतरा भी बढ़ता जा रहा था. अगर हाथी बैराज के गेट के बेहद करीब पहुंच जाते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी.
एक फोन कॉल और बंद हो गए बैराज के गेट
हाथियों के नदी में बहने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई. प्रभागीय वनाधिकारी ने तत्काल सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया. इसके बाद सिंचाई विभाग ने बिना समय गंवाए बैराज के गेट बंद कर दिए. गेट बंद होने के बाद नदी का बहाव कम हुआ. यही फैसला हाथियों के लिए जिंदगी की उम्मीद बन गया. पानी की रफ्तार कम होते ही हाथियों को संभलने का मौका मिला और वे धीरे-धीरे कम गहरे पानी की ओर बढ़ने लगे.
हांका लगाकर जंगल की ओर लौटाया गया कुनबा
पानी का बहाव कम होने के बाद वन कर्मियों ने लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी. काफी मशक्कत के बाद टीम ने हाथियों को हांका लगाकर नदी से दूर सुरक्षित दिशा में मोड़ दिया. कुछ देर की जद्दोजहद के बाद पूरा कुनबा जंगल की ओर लौट गया. तीन वयस्क और दो छोटे हाथी सुरक्षित बच गए. वन विभाग की तत्परता और सिंचाई विभाग की सूझबूझ से पांच बेजुबान जिंदगियां बच सकीं. बहराइच के डीएफओ अपूर्व दीक्षित के मुताबिक, हाथियों के बहने की सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग से संपर्क किया गया था. बैराज के गेट बंद होने से पानी का बहाव कम हुआ और हाथियों को सुरक्षित निकालना संभव हो सका. घटना के बाद नदी किनारे निगरानी और गश्त भी बढ़ा दी गई है.