मुर्गियों का दाना बनाइए और कमाई बढ़ाइए! खेती के साथ शुरू करें मुर्गी दाने का व्यवसाय, 35 फीसदी तक सब्सिडी
खेती के साथ कमाई बढ़ाना चाहते हैं तो पोल्ट्री फीड बिजनेस आपके लिए नया विकल्प बन सकता है. मक्का, सोयाबीन, गेहूं और चोकर से मुर्गियों का संतुलित दाना तैयार कर किसान अपनी जरूरत पूरी करने के साथ बाजार में बिक्री भी कर सकते हैं. पात्र इकाइयों को 35 फीसदी तक सब्सिडी मिल सकती है.
Poultry Feed Business: खेती से होने वाली आमदनी बढ़ाने के लिए किसान अब कृषि से जुड़े दूसरे कारोबार भी शुरू कर रहे हैं. पोल्ट्री फार्मिंग के बढ़ते दायरे के बीच मुर्गियों के दाने यानी पोल्ट्री फीड की मांग लगातार बनी रहती है. ऐसे में किसान खेती के साथ पोल्ट्री फीड तैयार करने की छोटी यूनिट लगाकर अतिरिक्त कमाई का जरिया बना सकते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत पात्र किसानों और उद्यमियों को फीड निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए परियोजना लागत पर सब्सिडी का लाभ मिल सकता है.
खेती के साथ शुरू करें पोल्ट्री फीड का कारोबार
पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसानों को हर महीने बड़ी मात्रा में मुर्गियों के दाने की जरूरत पड़ती है. बाजार से फीड खरीदने पर दाने की कीमत के अलावा परिवहन और भाड़े का खर्च भी जुड़ जाता है. ऐसे में किसान अपनी जरूरत के अनुसार छोटी पोल्ट्री फीड यूनिट स्थापित कर सकते हैं. शुरुआत में किसान फीड की खरीद-बिक्री का काम शुरू करके बाजार की मांग समझ सकते हैं और बाद में अपनी निर्माण इकाई लगाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. अपनी यूनिट होने से जरूरत के मुताबिक फीड तैयार करने और समय पर दाना उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है. हालांकि, फीड का उत्पादन केवल लागत कम करने तक सीमित नहीं है. मुर्गियों की उम्र और नस्ल के अनुसार पोषण संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है.
मक्का, सोयाबीन और चोकर से तैयार होता है दाना
पोल्ट्री फीड तैयार करने के लिए मक्का, सोयाबीन, गेहूं, चोकर, डीओआरबी, मिनरल मिक्सचर और विटामिन समेत कई तरह के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी सामग्री को पक्षियों की पोषण संबंधी जरूरत के हिसाब से उचित अनुपात में मिलाया जाता है. संतुलित फीड तैयार करने के लिए प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज और विटामिन की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी होता है. इसलिए किसान बिना विशेषज्ञ सलाह के कच्चे माल का अनुपात तय न करें. खराब गुणवत्ता या गलत मिश्रण से मुर्गियों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
यूनिट लगाने पर मिल सकती है 35 फीसदी तक सब्सिडी
उत्तर प्रदेश में कृषि से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है. पोल्ट्री फीड निर्माण इकाई के लिए पात्र लाभार्थियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, सब्सिडी की वास्तविक राशि परियोजना, पात्रता, अधिकतम सीमा और संबंधित योजना की शर्तों पर निर्भर करेगी. इसलिए यूनिट स्थापित करने से पहले किसान संबंधित विभाग से मौजूदा गाइडलाइन, पात्रता, स्वीकृत लागत, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी जरूर लें.
बड़े पोल्ट्री फार्म के लिए बन सकता है कमाई का जरिया
पोल्ट्री फीड निर्माण का कारोबार खासतौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास अपना पोल्ट्री फार्म है या जो आसपास के पोल्ट्री फार्मों को फीड की आपूर्ति करना चाहते हैं. अपनी जरूरत का दाना तैयार करने से बाहर से फीड मंगाने पर होने वाले परिवहन खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है. किसान चाहें तो अपनी यूनिट की क्षमता बढ़ाकर दूसरे पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी फीड बेच सकते हैं. इससे खेती और पशुपालन के साथ एक अतिरिक्त व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है. लेकिन कारोबार शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में फीड की मांग, कच्चे माल की उपलब्धता, मशीनरी, बिजली, भंडारण और गुणवत्ता मानकों का आकलन करना जरूरी है. योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन से पहले उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित विभाग की वर्तमान गाइडलाइन जरूर जांचें.