बरसात में पशुओं के पैरों का रखें खास ध्यान, वरना दूध और कमाई दोनों हो सकते हैं कम

बरसात के मौसम में नमी और कीचड़ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. पैरों और खुरों की सही देखभाल न होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है. कुछ आसान सावधानियां अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रख सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 22 Jun, 2026 | 07:20 PM

Animal Husbandry: बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है. लगातार बारिश, कीचड़ और नमी के कारण गाय-भैंसों के खुर लंबे समय तक गीले रहते हैं. इससे खुर मुलायम पड़ने लगते हैं और उनमें दरारें बनने का खतरा बढ़ जाता है.  पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, इन दरारों में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे संक्रमण की समस्या शुरू हो जाती है. यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पशु को चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है और उसका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है.

फुट रॉट और संक्रमण से घट सकता है दूध उत्पादन

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, बारिश के मौसम में पशुओं  में फुट रॉट (खुर सड़न), खुरों में सूजन, घाव और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं. संक्रमण बढ़ने पर पशु लंगड़ाने लगता है और दर्द के कारण कम चलने-फिरने लगता है. इसका सीधा असर उसके खान-पान पर पड़ता है. जब पशु पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं खाता, तो उसकी शारीरिक क्षमता कमजोर होने लगती है और दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है. गंभीर मामलों में संक्रमण पूरे पैर तक फैल सकता है, जिससे इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है.

देसी उपायों से किया जा सकता है शुरुआती बचाव

पशु चिकित्सक के अनुसार, पशुओं के खुरों  को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं. सप्ताह में एक या दो बार नीम की पत्तियों को उबालकर तैयार किए गए पानी से पशुओं के पैर धोने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. छोटे घावों पर हल्दी और सरसों के तेल का लेप लगाने से भी राहत मिलती है. इसके अलावा फिटकरी मिले गुनगुने पानी से खुरों की सफाई करने पर बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को रोकने में मदद मिलती है. हालांकि यदि घाव गहरा हो, मवाद निकल रहा हो या पशु लगातार लंगड़ा रहा हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है.

इन सावधानियों से पशु रहेंगे स्वस्थ

बरसात के दौरान पशुओं को हमेशा साफ, सूखी और ऊंची जगह पर बांधना चाहिए ताकि पानी जमा न हो. गोशाला में पानी निकासी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है. खुरों की नियमित कटाई और सफाई से गंदगी जमा नहीं होती और संक्रमण का खतरा  कम रहता है. पशुओं को सूखा और गुणवत्तापूर्ण चारा, पर्याप्त हरा चारा, स्वच्छ पानी तथा मिनरल मिक्सचर देना चाहिए ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे. साथ ही भीगा हुआ या सड़ा-गला चारा खिलाने से बचना चाहिए. यदि पशुपालक रोजाना पशुओं के पैरों की जांच करें और छोटी समस्याओं का समय पर समाधान करें, तो वे बड़ी बीमारियों, दूध उत्पादन में कमी और अतिरिक्त उपचार खर्च से बच सकते हैं.

Published: 22 Jun, 2026 | 09:22 PM

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