Cattle Disease: गर्मी में पशुओं पर बढ़ा लंपी वायरस का खतरा, ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं इलाज

गर्मी के मौसम में गाय-भैंसों में लंपी वायरस का खतरा बढ़ जाता है. यह बीमारी मच्छर, मक्खी और अन्य कीड़ों के जरिए तेजी से फैलती है. पशुओं के शरीर पर गांठें, बुखार और दूध कम होना इसके प्रमुख लक्षण हैं. समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और इलाज से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 14 Mar, 2026 | 09:33 AM

Lumpy Virus: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पशुओं में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें से एक खतरनाक बीमारी है लंपी वायरस, जो खासतौर पर गाय और भैंसों में तेजी से फैलती है. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह पशुओं के लिए जानलेवा भी बन सकती है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी, साफ-सफाई और समय पर इलाज से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसलिए पशुपालकों को इसके लक्षण और बचाव के उपाय जरूर पता होने चाहिए.

क्या है लंपी वायरस और क्यों है खतरनाक

नोएडा केवीके के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार लंपी वायरस  एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंसों को प्रभावित करती है. यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से पहुंच सकती है. इस बीमारी में पशु के शरीर पर गांठें या सूजन जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं. कई मामलों में पशुओं को तेज बुखार भी आ जाता है और उनकी हालत धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी पशुओं के लिए गंभीर बन सकती है और कई बार उनकी मौत तक हो सकती है.

कैसे फैलता है लंपी वायरस

विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस ज्यादातर मच्छरों, मक्खियों और खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से फैलता है. जब ये कीड़े किसी संक्रमित पशु  का खून चूसते हैं और फिर किसी स्वस्थ पशु को काटते हैं, तो वायरस उस पशु में भी पहुंच जाता है. इसके अलावा यह बीमारी संक्रमित पशुओं के लार, नाक से निकलने वाले स्राव, दूध या अन्य संपर्क से भी फैल सकती है. अगर पशु एक ही चारा या पानी साझा करते हैं तो संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है. छोटे बछड़ों में भी यह बीमारी जल्दी फैल सकती है क्योंकि वे मां का दूध पीते हैं और संक्रमित संपर्क में आ सकते हैं.

पशुओं में दिखने वाले प्रमुख लक्षण

लंपी वायरस होने पर पशुओं में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. सबसे पहले पशु को तेज बुखार आता है और वह सुस्त दिखाई देने लगता है. इसके बाद त्वचा पर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें या सूजन बनने लगती हैं. कई बार पशुओं के मुंह से लार या झाग निकलने लगता है और आंखों व नाक से पानी आने लगता है. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन  अचानक कम हो जाता है. इसके साथ ही पशु की भूख कम हो जाती है और वह कमजोर दिखाई देने लगता है. ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सालय में इलाज करवाना जरूरी होता है.

साफ-सफाई से कम हो सकता है खतरा

पशु विशेषज्ञों का कहना है कि लंपी वायरस से बचाव के लिए पशुओं के रहने की जगह की साफ-सफाई बहुत जरूरी है. जहां पशु बांधे जाते हैं, वहां नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए और गंदगी नहीं रहने देनी चाहिए. गंदगी होने पर मच्छर और मक्खियां ज्यादा पैदा होती हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा  बढ़ जाता है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुशाला को साफ रखें, समय-समय पर कीट नियंत्रण करें और पशुओं को साफ पानी और अच्छा चारा दें. इससे न केवल लंपी वायरस से बचाव होगा, बल्कि अन्य बीमारियों का खतरा भी कम रहेगा.

टीकाकरण और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार लंपी वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है. पशुपालकों को अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण जरूर करवाना  चाहिए. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके. अच्छी बात यह है कि यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती है. ज्यादातर मामलों में सही इलाज मिलने पर 6 से 7 दिनों में पशु ठीक हो सकते हैं. लेकिन अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए तो पशुओं की जान भी जा सकती है. इसलिए पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है. साफ-सफाई, टीकाकरण और समय पर इलाज से ही इस बीमारी से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.

Published: 14 Mar, 2026 | 09:30 AM

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