झींगा पालन से कम समय में होगा तगड़ा मुनाफा, बस किसान इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान

झींगा पालन के लिए सबसे जरूरी चीज है सही जगह और सही तालाब. इसके लिए बड़े या छोटे तालाब का इस्तेमाल किया जा सकता है. कई लोग खेत के एक हिस्से में गड्ढा खुदवाकर भी झींगा पालन शुरू कर देते हैं. आमतौर पर आधे हेक्टेयर से लेकर डेढ़ हेक्टेयर तक का तालाब झींगा पालन के लिए उपयुक्त माना जाता है.

नई दिल्ली | Published: 31 Jan, 2026 | 09:45 AM

आज के समय में खेती-किसानी के साथ अगर कोई काम तेजी से लोगों की आमदनी बढ़ा रहा है, तो वह है झींगा पालन. बढ़ती लागत, मौसम की मार और फसलों के उतार-चढ़ाव से परेशान किसान अब ऐसे विकल्प ढूंढ रहे हैं, जहां मेहनत का सही दाम मिले और जोखिम भी कम हो. झींगा पालन इसी जरूरत को पूरा करता है. गांव से लेकर कस्बों तक कई किसान और युवा इसे अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. सही जानकारी, थोड़ी योजना और नियमित देखभाल के साथ यह काम सचमुच धन की बरसात करा सकता है.

क्यों बढ़ रही है झींगा पालन की लोकप्रियता

झींगा आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद किया जाता है. होटल, रेस्टोरेंट और एक्सपोर्ट बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि झींगा की कीमत अच्छी मिलती है और किसान को अपनी उपज बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती. दूसरी ओर, फसल उगाने में जहां 4–6 महीने या उससे ज्यादा समय लगता है, वहीं झींगा पालन अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाता है. इससे साल में एक से ज्यादा बार उत्पादन और कमाई संभव हो पाती है.

झींगा पालन के लिए सही जगह और तालाब

झींगा पालन के लिए सबसे जरूरी चीज है सही जगह और सही तालाब. इसके लिए बड़े या छोटे तालाब का इस्तेमाल किया जा सकता है. कई लोग खेत के एक हिस्से में गड्ढा खुदवाकर भी झींगा पालन शुरू कर देते हैं. आमतौर पर आधे हेक्टेयर से लेकर डेढ़ हेक्टेयर तक का तालाब झींगा पालन के लिए उपयुक्त माना जाता है. तालाब की गहराई बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए. सामान्य तौर पर करीब 0.75 मीटर से लेकर अधिकतम 1.02 मीटर तक की गहराई सही रहती है.

तालाब की दीवारें सीधी और मजबूत होनी चाहिए, ताकि पानी का दबाव सह सके. ढालदार दीवारों से झींगा बाहर निकल सकता है या दीवारें कमजोर पड़ सकती हैं. साथ ही पानी की निकासी का सही इंतजाम होना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर तालाब का पानी बदला जा सके. साफ पानी झींगा की अच्छी बढ़वार के लिए बेहद जरूरी होता है.

झींगा पालन की तैयारी और देखभाल

तालाब तैयार करने के बाद अगला कदम होता है झींगा डालने की तैयारी. तालाब के पानी की गुणवत्ता, तापमान और ऑक्सीजन का स्तर सही होना चाहिए. झींगा को छुपने और आराम करने के लिए तालाब में कुछ जलीय वनस्पति या सुरक्षित जगह होनी चाहिए. इससे वे तनाव में नहीं रहते और तेजी से बढ़ते हैं.

झींगा पालन में नियमित देखभाल बहुत जरूरी है. समय पर सही मात्रा में दाना देना, पानी की जांच करना और साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी होता है. अगर झींगा को अच्छा माहौल मिलता है, तो बीमारी का खतरा भी कम हो जाता है और उत्पादन बढ़ता है.

मछली पालन के साथ झींगा पालन का फायदा

कई किसान झींगा पालन के साथ-साथ मछली पालन भी करते हैं. इससे तालाब का बेहतर उपयोग होता है और कमाई के स्रोत बढ़ जाते हैं. झींगा और मछली दोनों की बाजार में अच्छी मांग रहती है, इसलिए किसान को एक ही तालाब से दोहरा फायदा मिल सकता है. सही संतुलन और जानकारी के साथ यह तरीका और भी फायदेमंद साबित होता है.

झींगा पालन से कमाई का गणित

अब बात करते हैं सबसे अहम सवाल की कमाई कितनी होगी. बाजार में झींगा की कीमत आमतौर पर 200 से 250 रुपये प्रति किलो या इससे भी ज्यादा मिल जाती है. अगर कोई किसान एक एकड़ तालाब में झींगा पालन करता है, तो एक चक्र में वह करीब 3 लाख रुपये तक की आमदनी कर सकता है. इसमें से लगभग 1 लाख रुपये खर्च होते हैं, जिसमें तालाब की तैयारी, दाना और देखभाल शामिल है. इस तरह करीब 2 लाख रुपये का सीधा मुनाफा संभव है.

अगर किसान अनुभव के साथ साल में दो बार उत्पादन कर ले, तो यह कमाई और भी बढ़ सकती है. यही वजह है कि कई लोग पारंपरिक खेती छोड़कर झींगा पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बना रहे हैं.

मेहनत और समझदारी से सफलता

झींगा पालन कोई जादू नहीं है, लेकिन सही जानकारी और मेहनत से यह बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. शुरुआत में छोटे स्तर से काम शुरू करना और धीरे-धीरे अनुभव के साथ विस्तार करना बेहतर रहता है. सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ लेकर इस काम को और सुरक्षित बनाया जा सकता है.

Topics: