कम खर्च में शुरू करें मछली पालन, सरकार दे रही 50 फीसदी अनुदान और सस्ती दरों पर बीज
मछली पालन शुरू करने की योजना बना रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है. सरकार की अनुदान योजना के तहत कम लागत में गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने, खर्च कम करने और अतिरिक्त आय कमाने का अवसर मिलेगा. मानसून का मौसम इस काम के लिए उपयुक्त माना जाता है.
Fisheries Department: छत्तीसगढ़ में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. मानसून की शुरुआत के साथ ही जिले में मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य शुरू होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ मत्स्य विभाग के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से किसानों को रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रमुख प्रजातियों के गुणवत्तापूर्ण मछली बीज अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
मानसून के साथ शुरू होगा मत्स्य बीज उत्पादन
छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग के अनुसार वर्तमान समय मछलियों के प्रजनन का मौसम है. इसी को ध्यान में रखते हुए जिले के मत्स्य बीज उत्पादन केंद्रों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं. अच्छी बारिश शुरू होते ही शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र भोजपुरी में मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा. विभाग का लक्ष्य है कि जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक किसानों को मछली बीज उपलब्ध कराया जाए. इस दौरान रोहू, कतला और मृगल जैसी भारतीय मेजर कार्प प्रजातियों के बीज वितरित किए जाएंगे. प्रदेश में इन प्रजातियों की मांग सबसे अधिक रहती है क्योंकि इनका उत्पादन अच्छा होता है और बाजार में भी इनकी मांग बनी रहती है.
उंगली संचयन योजना के तहत मिलेगा 50 फीसदी अनुदान
मत्स्य विभाग द्वारा संचालित उंगली संचयन योजना किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इस योजना के तहत फिंगरलिंग यानी उंगली के आकार की मछलियों पर किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. विभाग के अनुसार यदि कोई किसान 2 हजार रुपये का मछली बीज खरीदता है तो उसे लगभग 4 हजार रुपये मूल्य तक का बीज उपलब्ध कराया जा सकता है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को कम लागत में मत्स्य पालन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है. इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.
इन केंद्रों से मिलेगा मछली बीज
जिले में किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए कई शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र संचालित किए जा रहे हैं. इनमें प्रमुख रूप से भोजपुरी, बेलमुंडी और निगारबंद मत्स्य बीज परिक्षेत्र शामिल हैं. किसान विभागीय प्रक्रिया पूरी कर इन केंद्रों से मछली बीज प्राप्त कर सकते हैं. विभाग का कहना है कि सभी बीज केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सके. इसके अलावा शासकीय बीज प्रक्षेत्रों में स्पान (मत्स्य बीज) लगभग 600 से 650 रुपये प्रति लाख की दर पर उपलब्ध कराया जाता है. वहीं फ्राई और संवर्धित बीज किसानों को रियायती एवं अनुदानित दरों पर दिए जाते हैं. विभिन्न प्रजातियों की कीमतें समय-समय पर विभाग द्वारा निर्धारित की जाती हैं.
मत्स्य उत्पादन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा
बिलासपुर जिला छत्तीसगढ़ में मत्स्य बीज उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां आधुनिक सर्कुलर हैचरी और मत्स्य बीज परिक्षेत्रों के माध्यम से रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प जैसी प्रजातियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है. यहां तैयार होने वाला मत्स्य बीज न केवल जिले और संभाग की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि राज्य के अन्य जिलों और कई बाहरी क्षेत्रों में भी भेजा जाता है. साथ ही विभाग द्वारा पारंपरिक मत्स्य पालन के अलावा केज कल्चर और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के अवसर बढ़ रहे हैं और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं. ऐसे में विभाग की अनुदान योजनाओं का लाभ उठाकर किसान कम निवेश में बेहतर उत्पादन हासिल कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं.