गर्मियों में पशुओं को खिलाएं ये हरा चारा, दूध बढ़ेगा और बीमारी का खतरा भी रहेगा बेहद कम
तेज गर्मी में सही हरा चारा पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन दोनों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार लोबिया, मक्का, ज्वार और नेपियर घास जैसे चारे पशुओं को ताकत देने के साथ उनकी सेहत भी बेहतर बनाए रखते हैं.
Green Fodder: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता पशुओं के खानपान को लेकर बढ़ जाती है. तेज गर्मी और सूखे मौसम में अगर पशुओं को सही पोषण नहीं मिले, तो दूध उत्पादन कम होने लगता है और पशु जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. ऐसे समय में हरा चारा पशुओं के लिए किसी प्राकृतिक ताकत से कम नहीं माना जाता. पशु विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में सही हरे चारे का इस्तेमाल पशुओं को स्वस्थ रखने, दूध बढ़ाने और शरीर में ताकत बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान गर्मियों में सही हरे चारे की खेती करें, तो पशुओं को भरपूर पोषण मिलने के साथ-साथ चारे की कमी की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो सकती है. खास बात यह है कि कुछ हरे चारे बहुत कम समय में तैयार हो जाते हैं और कम लागत में अच्छा उत्पादन देते हैं.
लोबिया और मक्का से मिलेगा भरपूर पोषण
गर्मियों के मौसम में लोबिया और मक्का का हरा चारा पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. लोबिया में प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है, जिससे पशुओं की कमजोरी दूर होती है और दूध उत्पादन में सुधार देखने को मिलता है. वहीं मक्का का हरा चारा पशुओं को ऊर्जा देने का काम करता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि ये दोनों फसलें लगभग 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाती हैं. किसान कम समय में ज्यादा हरा चारा हासिल कर सकते हैं. गर्मी में जब सूखे चारे की समस्या बढ़ने लगती है, तब ये फसलें पशुपालकों के लिए बड़ी राहत बन जाती हैं. लोबिया की एक खास बात यह भी है कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है. इससे अगली फसल को भी फायदा मिलता है और खेत की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.
नेपियर घास और ज्वार भी हैं फायदेमंद
नेपियर घास को गर्मियों के लिए सबसे अच्छा हरा चारा माना जाता है. यह तेजी से बढ़ती है और कई बार कटाई के बाद भी दोबारा तैयार हो जाती है. इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अच्छी होती है, जिससे पशुओं की सेहत मजबूत बनी रहती है. इसके अलावा ज्वार का हरा चारा भी दूध देने वाले पशुओं के लिए काफी उपयोगी माना जाता है. ज्वार में फाइबर और ऊर्जा दोनों अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इससे पशुओं का पाचन सही रहता है और शरीर में पानी की कमी भी कम होती है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान ज्वार और नेपियर घास की खेती सही तरीके से करें, तो पूरे गर्मी के मौसम में चारे की कमी नहीं होगी. इससे बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत भी कम पड़ सकती है.
हरा चारा बढ़ाएगा दूध उत्पादन
गर्मी में पशुओं का दूध कम होना एक आम समस्या मानी जाती है. इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पोषण और पानी की कमी होता है. हरा चारा पशुओं के शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करता है, जिससे दूध उत्पादन बेहतर बना रहता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि हरे चारे में विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है और वे जल्दी बीमार नहीं पड़ते. अगर पशुओं को सूखे चारे के साथ संतुलित मात्रा में हरा चारा दिया जाए, तो उनका वजन भी बेहतर रहता है और दूध की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलता है.
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार
हरा चारा सिर्फ पशुओं की सेहत के लिए ही नहीं बल्कि किसानों की कमाई बढ़ाने में भी मदद करता है. जब पशु स्वस्थ रहते हैं और ज्यादा दूध देते हैं, तो पशुपालकों की आय भी बढ़ती है. कम समय में तैयार होने वाली चारा फसलें किसानों की लागत को भी कम करती हैं. कई किसान अब अपनी खाली जमीन पर हरे चारे की खेती शुरू कर रहे हैं ताकि सालभर पशुओं को पौष्टिक भोजन मिल सके. विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में अगर किसान सही हरे चारे की खेती पर ध्यान दें, तो पशुपालन का काम ज्यादा लाभकारी बन सकता है. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशु स्वस्थ रहेंगे और किसानों को आर्थिक फायदा भी मिलेगा.