पशुपालकों के लिए कमाई का नया रास्ता! अब 10 रुपये लीटर बिकेगा गोमूत्र, यूपी में पायलट प्रोजेक्ट शुरू

Gold Price Today: सावन के दूसरे सोमवार यानी 10 अगस्त को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,52,540 रुपये प्रति 10 ग्राम और मुंबई में 1,52,340 रुपये पर पहुंच गया. हालांकि, पिछले एक सप्ताह में सोना करीब 8,180 रुपये और चांदी 10,000 रुपये प्रति किलो तक महंगी हुई है.

नोएडा | Updated On: 10 Aug, 2026 | 08:54 PM

Cow Urine Based Products: उत्तर प्रदेश के गांवों में किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है. बुलंदशहर में किसान उत्पादक संगठन यानी FPO के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमूत्र की खरीद शुरू की गई है. इस पहल के तहत किसानों और पशुपालकों से गोमूत्र 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है. इस योजना का मकसद पशुपालकों को दूध के अलावा कमाई का एक और जरिया देना है. अगर बुलंदशहर में यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे प्रदेश के दूसरे जिलों में भी लागू करने की तैयारी की जा सकती है.

15 गांवों से शुरू हुई गोमूत्र खरीद

बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव से इस पहल की शुरुआत हुई है. डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में FPO के माध्यम से आसपास के करीब 15 गांवों को इस योजना से जोड़ा गया है. पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए गांवों में ही संग्रह केंद्र बनाए गए हैं. फिलहाल इन केंद्रों के जरिए रोजाना करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है. योजना में मांग बढ़ने पर खरीद की कीमत को आगे चलकर 20 रुपये प्रति लीटर तक करने की योजना भी बताई गई है.

गांव में ही लगाए गए 200 लीटर के टैंक

गोमूत्र को सुरक्षित तरीके से जमा करने के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं. इससे पशुपालकों को अपने घर या आसपास से गोमूत्र संग्रह केंद्र तक पहुंचाने में आसानी हो रही है. इस पूरी व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं को भी जोड़ा गया है. गोमूत्र संग्रह में सहयोग करने वाली महिलाओं को 2 रुपये प्रति लीटर कमीशन दिया जा रहा है. यानी गोमूत्र इकट्ठा करने के काम से भी महिलाओं को अतिरिक्त कमाई का मौका मिल रहा है.

300 महिलाओं को बनाया गया शेयरहोल्डर

इस पहल को सिर्फ गोमूत्र खरीदने तक सीमित नहीं रखा गया है. इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से भी जोड़ा गया है. जानकारी के मुताबिक, करीब 300 महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है. इससे वे संग्रह व्यवस्था के साथ-साथ इस पूरे आर्थिक मॉडल का हिस्सा बन रही हैं. खासकर पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का अवसर बन सकता है. योजना के विस्तार के साथ और महिलाओं को इससे जोड़ने की संभावना है.

गोमूत्र से बनाए जा रहे कृषि उपयोगी उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल खेती में काम आने वाले कुछ उत्पाद तैयार करने के लिए किया जा रहा है. इसमें अलग-अलग जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों को समितियों के जरिए किसानों तक पहुंचाने की योजना है. पहल के पीछे गोमूत्र आधारित प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने का विचार है. इससे पशुपालकों से मिलने वाले संसाधन का इस्तेमाल करने के साथ खेती में प्राकृतिक विकल्पों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.

दूध के अलावा बनेगा कमाई का नया जरिया

गांवों में पशुपालकों की आमदनी का बड़ा हिस्सा दूध और उससे जुड़े उत्पादों से आता है. ऐसे में गोमूत्र की खरीद उनके लिए कमाई का एक अतिरिक्त साधन बन सकती है. फिलहाल 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद हो रही है और भविष्य में इसे 20 रुपये तक बढ़ाने की योजना है. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और दूसरे जिलों में भी लागू होता है, तो बड़ी संख्या में पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं को इससे जुड़ने का मौका मिल सकता है.

Published: 11 Aug, 2026 | 06:00 AM

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