बैंक का काम छोड़ अशोक मंडल ने शुरू किया नर्सरी बिजनेस, देशभर में सप्लाई कर रहे हर तरह के पौधे
अशोक मंडल ने कहा कि अगर कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी काम छोटा नहीं होता. नौकरी की सुरक्षित राह छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुनने वाले धनबाद के अशोक मंडल मेहनत कर सफल नर्सरी संचालक बन चुके हैं. उन्होंने न केवल खुद के लिए राह बनाई, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार दिया है.
झारखंड के धनबाद निवासी अशोक मंडल ने बैंक की नौकरी छोड़ नर्सरी का कारोबार शुरू किया और आज वह लाखों रुपये की आमदनी कमा रहे हैं. उन्होंने 8 लोगों को रोजगार भी दे रखा है. उन्होंने कहा कि 10 हजार पौधों से शुरू की थी जो अब डेढ़ लाख पौधों तक पहुंच गई है. उनके यहां सब्जी, फूल, फलों के पौधे तैयार किए जाते हैं. व्यापारी और किसान उनकी नर्सरी आकर पौधे खरीदते हैं. ऑनलाइन ऑर्डर मिलने पर वह बोकारो, धनबाद, हजारीबाग समेत राज्य के सभी बड़े शहरों में सप्लाई करते हैं.
10 हजार पौधों का सफर डेढ़ लाख पौधों के पार पहुंचा
झारखंड के कृषि विभाग के अनुसार धनबाद के धोकरा निवासी अशोक मंडल पहले एसबीआई में मैसेंजर का काम करते थे. उन्होंने करीब सात साल तक नौकरी करने के बाद 2014 में कम वेतन के चलते नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया. 2019 में उन्होंने छोटे स्तर पर करीब 10 हजार पौधों के साथ नर्सरी की शुरुआत की और उनकी नर्सरी में 1.5 लाख से ज्यादा पौधे हैं. उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार होने लगा.
स्वरोजगार से खुद सफल हुए और 8 लोगों को रोजगार दिया
अशोक मंडल ने कहा कि अगर कुछ अलग करने का जुनून हो तो कोई भी काम छोटा नहीं होता. नौकरी की सुरक्षित राह छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुनने वाले धनबाद के अशोक मंडल मेहनत कर सफल नर्सरी संचालक बन चुके हैं. उन्होंने न नर्सरी कारोबार शुरू करके केवल खुद के लिए राह बनाई, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के मौके पैदा किए और 8 लोग परमानेंट उनके यहां रोजगार करते हैं. वर्तमान में नर्सरी में करीब 8 लोग स्थायी रूप से काम कर रहे हैं, जबकि सीजन के समय यह संख्या बढ़कर 12 से 15 तक पहुंच जाती है.
नर्सरी में फल-फूल और औषधीय पौधे
अशोक मंडल बताते हैं कि बचपन से ही खेती और पौधों में रुचि रखते थे. उन्होंने बताया कि बैंक में काम करने के दौरान एग्रीकल्चर से जुड़े एक मैनेजर से उन्हें काफी कुछ सीखने का मौका मिला. आज उनकी नर्सरी में फल, फूल, सब्जियां, और औषधीय पौधों की संख्या डेढ़ लाख के पार जा चुकी है. उन्होंने कहा कि वह अपनी नर्सरी में हर तरह के पौधे तैयार करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग फोन करके पौधों की डिमांड करते हैं, जिसे पूरा किया जाता है.
अशोक मंडल की नर्सरी में डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे हैं.
दूसरे राज्यों से पौधों की डिमांड बढ़ रही
अशोक मंडल की नर्सरी अब सिर्फ धनबाद तक सीमित नहीं है. जामताड़ा, रांची, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, हजारीबाग और डालटनगंज समेत कई जिलों से लोग यहां पौधे खरीदने पहुंचते हैं. सीजन के समय दूसरे राज्यों के शहरों से भी उन्हें ऑर्डर मिलते हैं. उन्हें नर्सरी से सफल कारोबार खड़ा करते देख कई लोग प्रेरित होकर नर्सरी खोली है और वे भी अच्छी कमाई हासिल कर पा रहे हैं.