फर्जी बिल पर फैक्ट्रियों में खपाई जा रही एग्री ग्रेड यूरिया, इथेनॉल प्लांट में नकली खाद का जखीरा मिला

Urea Scam Haryana: किसानों के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जाने वाली एग्रीकल्चर ग्रेड यूरिया को फर्जी तरीके से टेक्निकल ग्रेड मार्क वाली बोरियों में भरकर इथेनॉल फैक्ट्री में इस्तेमाल करते पकड़ा गया है.

नोएडा | Updated On: 9 Jul, 2026 | 07:14 PM

फर्जी बिल और मार्क को लगाकर कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में किया जा रहा है. सरकारी मिलीभगत से सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया का इस्तेमाल फैक्ट्रियों में किया जा रहा है. जबकि, औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल वाली यूरिया कई गुना महंगी कीमत पर मिलती है. ताजा मामले में हरियाणा में इथेनॉल प्लांट में कृषि ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया के फर्जी बिलों और मार्क दिखाकर खपाते हुए पकड़ा गया है. यह यूरिया की बोरियां दिल्ली की फर्म से फर्जी बिलों पर तैयार की गईं और राजस्थान भेजी गईं हैं, जिन्हें हरियाणा के प्लांट में जब्त किया गया है.

इथेनॉल फैक्ट्री में फर्जी बिलों और मार्क वाले यूरिया बैग मिले

भारतीय किसान एकता (बीकेई) के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि किसानों के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जाने वाली एग्रीकल्चर ग्रेड (नीम-कोटेड) यूरिया को फर्जी तरीके से टेक्निकल ग्रेड मार्क वाली बोरियों में भरकर गांव डबवाली के पन्नीवाला रूलदु स्थित ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में इस्तेमाल करते पकड़ा गया है. यहां इथेनॉल बनाया जाता है. किसान नेता की शिकायत पर सिरसा के उप कृषि निदेशक, कृषि विभाग की टीम गुण नियंत्रण अधिकारी अमित कुमार, एपीपीओ विजेंद्र चौहान, एसडीओ अमित कुमार ने मामले की जांच के बाद भारी संख्या में कृषि कार्यों वाली खाद को जब्त किया है. फैक्ट्री के मालिक हरी ग्रोवर के खिलाफ सदर थाना डबवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है.

कृषि विभाग की टीम ने फैक्ट्री के अधिकारियों से यूरिया खाद से संबंधित मांगे गए, लेकिन वह पूरे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए. यूरिया खाद के स्टोर में कई तरह की बोरियां रखी हुई थीं. विभाग ने फैक्ट्री संचालकों से कहा कि सारी बोरियां अलग-अलग करके लगाएं, ताकि हमें पता चले कौन से मार्क वाली कितनी बोरियां हैं. लेकिन फैक्ट्री संचालकों ने इस काम के लिए ना तो कोई कागजात दिए और ना ही मजदूर दिए. कृषि विभाग ने बाहर से लेबर मंगवाकर बोरियों को अलग-अलग कराया और उनकी गिनती करने के बाद पुलिस की मौजूदगी में जांच के लिए सैंपल लिए.

25 हजार किलो यूरिया के फर्जी बिल, दस्तावेज बरामद

किसान नेता लखविंदर औलख ने बताया कि मौके पर मिलीं 50 किलोग्राम की बोरियों पर निर्माता कंपनी का नाम, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी), बैच नंबर और अन्य आवश्यक विवरण अंकित नहीं थे. अलग-अलग तरह के फर्जी मार्क लगाए हुए थे. उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार यह सामग्री दिल्ली के बुराडी में संत नगर स्थित शुभम इंटरनेशनल से बिल की गई और राजस्थान झुंझुनू से भेजी गई है. दस्तावेजों में 25,000 किलोग्राम खाद का बिल लगभग 18.50 प्रति किलोग्राम (925 प्रति 50 किलोग्राम और 18 फीसदी जीएसटी अतिरिक्त) दर्शाया गया है.

फर्जी बिलों पर खपाई जा रही कृषि ग्रेड यूरिया को जब्त करते कृषि अधिकारी. साथ में बीकेई के किसान नेता.

कई गुना सस्ती होने के चलते हो रही घोटालेबाजी

किसान नेता ने कहा कि फैक्ट्री से नीम कोटेड यूरिया के 45 किलो वाले पीली बोरियां मिली हैं, जो फसलों में इस्तेमाल के लिए किसानों को सब्सिडी के साथ 266.50 रुपए में दी जाती हैं. उन्होंने कहा औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल के लिए टेक्निकल ग्रेड यूरिया दी जाती है और इसकी कीमत 3250 रुपये प्रति बोरी है. ऐसे में जालसाज कृषि वाली सस्ती यूरिया फर्जी तरीके से औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल करते हैं और फर्जी बिल लगाकर करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है. किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया का फर्जी तरीके से औद्योगिक उपयोग होने से किसानों के लिए खाद की उपलब्धता प्रभावित हो रही है.

करोड़ों का यूरिया घोटाला होने का आरोप

किसान नेता ने आरोप लगाया कि मौके पर जो सामग्री दिखाई गई, वह दस्तावेजों में दर्शाए गए टेक्निकल ग्रेड उत्पाद से मेल नहीं खाती. उन्होंने मांग की कि बिल, माल, पैकिंग, गुणवत्ता तथा आपूर्ति श्रृंखला की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके. उन्होंने कहा कि यह करोंड़ों के यूरिया खाद घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से करवाई जाए, क्योंकि इसमें कई राज्यों के यूरिया खाद के स्मगलर जुड़े हुए हैं, जो किसानों के हक की यूरिया के साथ-साथ करोड़ों की जीएसटी चोरी कर रहे हैं।.

Published: 9 Jul, 2026 | 07:07 PM

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