हिमाचल में सेब के कचरे से बना वीगन लेदर, 34 वर्षीय युवा की खोज ने सबको चौंकाया
हिमाचल प्रदेश में सेब प्रसंस्करण के बाद बचने वाले अवशेष को अब नई पहचान मिल रही है. एक भारतीय युवा उद्यमी ने इस कृषि कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदलकर नवाचार की मिसाल पेश की है. यह पहल पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ उत्पादन और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
Vegan Leather: हिमाचल प्रदेश में हर साल बड़ी मात्रा में सेब का उत्पादन होता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है. सेबों का उपयोग ताजे फलों के साथ-साथ जूस बनाने में भी किया जाता है. जूस तैयार करने के बाद बड़ी मात्रा में छिलके और अन्य अवशेष बच जाते हैं, जिन्हें आमतौर पर बेकार समझा जाता है. लेकिन अब इसी अवशेष को आय का नया स्रोत बनाया जा रहा है. ANI की ओर से प्रकाशित वीडियो के अनुसार, सेब से निकले इस अवशेष को सुखाकर उपयोगी कच्चे माल में बदला जा रहा है और आगे की प्रोसेसिंग के लिए गुजरात भेजा जा रहा है.
कचरे से कमाई की मिसाल बना सेब का अवशेष
हिमाचल में जूस उत्पादन के बाद बचने वाले सेब के अवशेष को पहले सुखाया जाता है. इसके बाद इसे पैक करके गुजरात के सूरत भेजा जाता है. ये पहल केवल कचरे के निपटान तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों और उद्योगों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर भी तैयार कर रही है. इस प्रक्रिया से पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और कृषि अपशिष्ट का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है. यही कारण है कि इस मॉडल को वेस्ट टू वेल्थ यानी कचरे से संपदा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
युवा उद्यमी ने बनाया सेब से वीगन लेदर
सूरत में 34 वर्षीय युवा उद्यमी और हिमालय कॉटन यार्न लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रविराज देसाई (Raviraj Desai) ने इस विचार को नई ऊंचाई दी है. पारिवारिक कॉटन यार्न व्यवसाय से जुड़े रविराज ने सेब के सूखे अवशेष का उपयोग कर वीगन लेदर विकसित किया है. ANI के वीडियो में उन्होंने बताया कि सेब से प्राप्त पाउडर को विशेष रेजिन लिक्विड के साथ मिलाया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को टिकाऊ फैब्रिक पर कोटिंग के रूप में लगाया जाता है. इस प्रक्रिया के जरिए ऐसा पदार्थ तैयार होता है, जो दिखने और उपयोग में पारंपरिक लेदर जैसा महसूस होता है, लेकिन इसमें किसी जानवर की खाल का इस्तेमाल नहीं किया जाता.
टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ता भारत
सोलन से सूरत तक की ये पहल दिखाती है कि नवाचार और तकनीक के सहारे कृषि अपशिष्ट को मूल्यवान उत्पाद में बदला जा सकता है. सेब के कचरे से तैयार वीगन लेदर न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार है, बल्कि पशु-आधारित उत्पादों के विकल्प के रूप में भी उभर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो कृषि कचरे की समस्या को कम करने के साथ-साथ नए रोजगार और कारोबार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं. ये पहल भारत में टिकाऊ उद्योग और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है. (ANI द्वारा प्रकाशित वीडियो के अनुसार).