अब स्कूलों में बच्चे खुद करेंगे मिट्टी की टेस्टिंग, 7वीं से 11वीं तक के छात्रों को मिलेगा वैज्ञानिक बनने का मौका

बिहार सरकार के इस नई पहल से 7वीं से 11वीं कक्षा के छात्र अब स्कूलों में खुद मिट्टी की टेस्टिंग करना सीखेंगे. इससे उन्हें वैज्ञानिक प्रयोगों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, कृषि और मिट्टी की गुणवत्ता को समझने का अवसर मिलेगा तथा विज्ञान के प्रति रुचि भी बढ़ेगी.

नोएडा | Updated On: 16 Jun, 2026 | 03:31 PM

Soil Testing Lab: बिहार में स्कूली शिक्षा और कृषि को जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है. राज्य के 629 विद्यालयों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां छात्र मिट्टी परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया सीखेंगे. इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना, कृषि के प्रति रुचि बढ़ाना और किसानों को मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है. इस संबंध में सोमवार को पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में विस्तृत चर्चा की गई.

629 विद्यालयों में स्थापित होंगी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं

समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा  ने अधिकारियों को राज्य के 629 विद्यालयों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सरकार की सोच है कि छात्र विद्यालय स्तर पर ही मिट्टी परीक्षण की तकनीक सीखें और इसका लाभ किसानों तक पहुंचे. वर्तमान में राज्य के 160 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं. अब इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए अधिक विद्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा.

छात्रों में विकसित होगी वैज्ञानिक सोच

इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से सातवीं से 11वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं मिट्टी के नमूने एकत्र करने, उनकी जांच करने और मृदा स्वास्थ्य  को समझने जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेंगे. सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में अनुसंधान की प्रवृत्ति, तकनीकी कौशल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा. साथ ही कृषि और पर्यावरण के प्रति उनकी समझ भी मजबूत होगी. यह पहल स्कूलों, छात्रों और किसानों के बीच एक प्रभावी समन्वय स्थापित करने का माध्यम बनेगी.

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी खर्च

वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय में प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है. इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करेगी. भारत सरकार ने प्रत्येक विद्यालय को 50 मिट्टी नमूनों का संग्रहण और परीक्षण करने के साथ किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित  करने का लक्ष्य भी दिया है. इससे किसानों को अपनी जमीन की गुणवत्ता के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने में मदद मिलेगी.

ड्रैगन फ्रूट और बागवानी योजनाओं की भी समीक्षा

बैठक में मुख्यमंत्री बागवानी मिशन  के तहत संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई. कृषि मंत्री ने ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों के लिए तीन करोड़ रुपये की लागत से इस योजना को मंजूरी दी गई है. उन्होंने कहा कि बिहार में बागवानी, औषधीय और मसाला फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर युवाओं को खेती से जोड़ना और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना.

Published: 16 Jun, 2026 | 02:27 PM

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