हरी सब्जियों में कैंसर कारक तत्व मिलने से हड़कंप, जांच में मात्रा अधिक मिली.. वैज्ञानिकों की मदद लेगी सरकार

सरकार ने कुछ जिलों में पत्तेदार और जड़ वाली सब्जियों में बढ़ते आर्सेनिक लेवल से निपटने के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट और अधिकारियों को शामिल करने का फैसला किया है. आर्सेनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक तत्व होता है. इसकी वजह से कैंसर भी हो सकता है और दांतों में सड़न रोग फैलने का खतरा होता है.

नोएडा | Updated On: 22 Feb, 2026 | 06:05 PM

बिहार सरकार ने कुछ जिलों में पत्तेदार और जड़ वाली सब्जियों में बढ़ते आर्सेनिक लेवल से निपटने के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट और अधिकारियों को शामिल करने का फैसला किया है. आर्सेनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक तत्व होता है. इसकी वजह से कैंसर भी हो सकता है और दांतों में सड़न रोग फैल सकता है. कृषि विभाग की जांच के बाद आलू समेत अन्य पत्तेदार सब्जियों नें आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई है. राज्य के कृषि मंत्री ने इसे गंभीर स्थिति बताया है.

बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए एक जागरूकता अभियान शुरू करने की भी योजना बना रही है, ताकि उन्हें सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया जा सके. उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि आर्सेनिक से दूषित ग्राउंडवाटर की वजह से राज्य के कुछ हिस्सों में पत्तेदार सब्जियों, जड़ वाली सब्जियों, जिनमें आलू भी शामिल हैं और खेती से जुड़े दूसरे उत्पादों में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ गई है.

सब्जियों में आर्सेनिक कम करने के लिए वैज्ञानिक मदद करेंगे

कृषि मंत्री ने कहा कि हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ ही आलू व अन्य सब्जियों में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई है. यह गंभीर चिंता की बात है. कृषि मंत्री ने कहा कि सब्जियों में आर्सेनिक की मात्रा कम करने के लिए पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग (PHED), हेल्थ और माइनर वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट और अधिकारियों की मदद ली जाएगी. इसके साथ ही अधिक आर्सेनिक वाले इलाकों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं.

जांच में लिमिट से ज्यादा हानिकारक आर्सेनिक की मात्रा पाई गई

बिहार कृषि विभाग के अनुसार पत्तेदार सब्जियों में आर्सेनिक की मात्रा 0.1 mg प्रति kg, आलू समेत जड़ वाली सब्जियों में 0.3 mg प्रति kg और धान की फसलों में 1.0 mg प्रति kg दर्ज की गई है. यह स्थिति बेहद खतरनाक है. जबकि, आर्सेनिक की स्वीकार्य सीमा 0.01 mg प्रति लीटर और फ्लोराइड 1.0 mg प्रति लीटर है. इन सीमाओं से ज्यादा होने पर हड्डियों में फ्लोरोसिस और दांतों में सड़न जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए 4,709 वार्डों में आर्सेनिक शुद्धिकरण उपकरण लगाए गए हैं.

14 जिलों के ग्राउंडवॉटर में मिले खतरनाक तत्व

बिहार के जन स्वास्थ्य विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने हाल ही में राज्य विधानसभा में कहा था कि 14 जिलों में ग्राउंडवाटर में आर्सेनिक, 11 जिलों में फ्लोराइड और 12 जिलों में आयरन पाया गया है. उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में नाइट्रेट का लेवल भी तय स्टैंडर्ड से ज्यादा हो गया है, जिससे हैंडपंपों पर लाल रंग से निशान लगाकर लोगों को पीने के लिए पानी इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी गई है. राज्य सरकार ‘हर घर नल का जल’ स्कीम के तहत साफ पीने का पानी दे रही है, और किसानों को खेती के लिए साफ पानी सप्लाई करने के दूसरे तरीकों की प्लानिंग कर रही है. पानी की क्वालिटी की रेगुलर जांच की जा रही है.

Published: 22 Feb, 2026 | 06:03 PM

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