Odisha News: ओडिशा में खरीफ सीजन के दौरान प्रमाणित धान बीजों की बिक्री उम्मीद से काफी कम रही है. ओडिशा स्टेट सीड्स कॉरपोरेशन (OSSC) ने अब तक 1.22 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज बेचे हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के 1.45 लाख क्विंटल से कम है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमाणित बीजों का कम उपयोग फसल उत्पादन और खेती की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है. बड़ी बात यह है कि राज्य में अवैध तरीके से पान दुकानों पर बिना प्रमाणित धान के बीज बेचे जा रहे हैं. इससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है. ऐसे चालू खरीफ सीजन के लिए निगम ने 1.65 लाख क्विंटल बीज बिक्री का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह भी राज्य की वास्तविक जरूरत से काफी कम है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में राज्य में करीब 37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होने का अनुमान है. औसतन 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर के हिसाब से राज्य को लगभग 10 लाख क्विंटल धान बीज की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार, फसल की बेहतर पैदावार के लिए कम से कम 35 फीसदी क्षेत्र में प्रमाणित बीजों का उपयोग होना चाहिए. इस हिसाब से राज्य को करीब 3.5 लाख क्विंटल प्रमाणित धान बीज की आवश्यकता है. लेकिन OSSC अपने लक्ष्य को भी पूरा कर लेता है, तब भी प्रमाणित बीजों का उपयोग केवल 16.5 फीसदी तक ही पहुंच पाएगा, जो तय मानक के आधे से भी कम है.
फसल की उत्पादकता पर असर डाल सकता है
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमाणित बीजों का कम उपयोग फसल की उत्पादकता पर असर डाल सकता है और किसानों को बेहतर उत्पादन से मिलने वाले लाभ से वंचित कर सकता है. ओडिशा में प्रमाणित धान बीजों की बिक्री में गिरावट को लेकर ओडिशा स्टेट सीड्स कॉरपोरेशन (OSSC) ने सरकारी समर्थन की कमी और कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों के कमजोर सहयोग को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि निजी बीज कारोबारियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि सरकारी वितरण प्रणाली के जरिए प्रमाणित बीजों को पर्याप्त बढ़ावा नहीं मिल रहा है.
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अवैध तरीके से हो रही धान बीज की बिक्री
कहा जा रहा है कि राज्य सरकार ने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को निजी कारोबारियों से प्राप्त बीज बेचने की अनुमति दे दी है, जबकि उनकी गुणवत्ता का उचित सत्यापन नहीं किया जाता. कई जिलों में ‘ट्रंप’ और ‘ओबामा’ जैसे ब्रांड नामों से बिना जांचे-परखे बीज किराना और पान की दुकानों तक पर बेचे जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि बाजार की निगरानी कमजोर होने के कारण ऐसे बीजों की बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. ऐसे बिना वैध लाइसेंस के बीज बेचना बीज अधिनियम, 1966 के तहत दंडनीय अपराध है. हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या कृषि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
‘कृषक ओडिशा’ पोर्टल पर करें आवेदन
ओडिशा में किसानों के बीच OSSC के प्रमाणित बीजों की मांग कम होने के पीछे एक वजह सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना को भी माना जा रहा है. OSSC के एक अधिकारी के अनुसार, किसानों को पहले बीज की पूरी कीमत चुकानी पड़ती है और बाद में सब्सिडी उनके खाते में आती है. इस कारण कई किसान प्रमाणित बीज खरीदने से बच रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि धान बीज खरीदने के लिए किसानों को ‘कृषक ओडिशा’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना पड़ता है. यह प्रक्रिया भी कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है और बीजों की बिक्री पर असर डाल रही है.