बिहार में 101 किसानों पर सख्त कार्रवाई, 3 साल का लगा बैन.. नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

बिहार में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. कृषि विभाग ने पर्यावरण और मिट्टी संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बड़ी कार्रवाई की है. कई किसानों की पहचान कर उनके खिलाफ कदम उठाए गए हैं. इसका उद्देश्य किसानों को जागरूक करना और पराली जलाने से रोकना है.

नोएडा | Updated On: 25 Apr, 2026 | 10:02 PM

Stubble Burning: बिहार के कैमूर जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. कृषि विभाग ने पर्यावरण और मिट्टी की सेहत को बचाने के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए 101 किसानों को मिल रही सरकारी लाभ पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है. ये कदम किसानों को पराली जलाने से रोकने और वैकल्पिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

फसल अवशेष जलाने पर प्रशासन की सख्ती बढ़ी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कैमूर जिले में फसल कटाई  के बाद बचे अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. कृषि विभाग के अनुसार, जिले में ऐसे किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है जो खेतों में पराली जला रहे थे. इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा और मिट्टी की गुणवत्ता को बचाना है. अब तक कुल 101 किसानों की पहचान की गई है, जिन्होंने फसल अवशेष जलाया था. इन सभी किसानों का निबंधन लॉक कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि ये किसान अगले तीन साल तक सरकार की किसी भी कृषि योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे.

भभुआ और मोहनियां में दर्ज हुई प्राथमिकी

प्रशासन ने सिर्फ निबंधन लॉक करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है, बल्कि कानूनी कदम भी उठाए हैं. भभुआ और मोहनियां प्रखंड में दो-दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है. जिला प्रशासन का कहना है कि जो किसान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी. इससे अन्य किसानों को भी संदेश मिले कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

सैटेलाइट और टीम से हुई पहचान

कृषि विभाग के जिला पदाधिकारी विकास कुमार ने मीडिया को जानकारी दी कि किसानों की पहचान आधुनिक तकनीक  और फील्ड स्तर पर जांच के आधार पर की गई है. सैटेलाइट निगरानी और भ्रमणशील कृषि कर्मियों की रिपोर्ट के जरिए उन खेतों की पहचान हुई जहां पराली जलाने की घटना हुई थी. इसके बाद किसानों की सूची तैयार की गई. कुल 101 किसानों में सबसे ज्यादा 45 किसान मोहनियां प्रखंड से हैं. भभुआ में 31 किसान, रामगढ़ और नुआंव में 9-9 किसान, कुदरा में 3 किसान, जबकि रामपुर और भगवानपुर में 2-2 किसानों की पहचान हुई है.

पर्यावरण और मिट्टी बचाने की अपील

कृषि विभाग ने बताया कि फसल अवशेष जलाने  से जमीन की उर्वरक क्षमता (Fertility) पर बहुत बुरा असर पड़ता है. वैज्ञानिकों के अनुसार इससे मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जैसे-

इसके अलावा मिट्टी की बनावट खराब हो जाती है और पानी सोखने की क्षमता  भी घट जाती है. इसी वजह से किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है. जागरूकता रथ को जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर विभिन्न प्रखंडों में भेजा है, ताकि किसानों को बताया जा सके कि पराली जलाना कितना नुकसानदायक है. कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक उपाय भी दे रहा है. फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों पर सरकार अनुदान भी दे रही है, जिससे किसान बिना नुकसान के पराली का उपयोग कर सकें.

Published: 26 Apr, 2026 | 06:00 AM

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