मखाना से ऑयल पाम तक! बिहार-तेलंगाना के बीच बड़ा कृषि समझौता, किसानों को मिलेगा फायदा

बिहार और तेलंगाना ने खेती में तकनीकी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. बिहार ऑयल पाम की आधुनिक खेती और प्रोसेसिंग सीखेगा, जबकि तेलंगाना मखाना उत्पादन, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग मॉडल अपनाने की तैयारी करेगा.

नोएडा | Updated On: 14 Aug, 2026 | 08:20 PM

Bihar Agriculture: देश में फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बिहार और तेलंगाना ने नई कृषि साझेदारी की पहल की है. कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार दोनों राज्यों के कृषि मंत्रियों की बैठक में यह तय हुआ कि बिहार तेलंगाना के ऑयल पाम खेती मॉडल का अध्ययन करेगा, जबकि तेलंगाना बिहार के मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन मॉडल से सीख लेगा. इस सहयोग के तहत तकनीक, किसान प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि प्रणालियों का आदान-प्रदान किया जाएगा.

ऑयल पाम खेती का अध्ययन करेगा बिहार

बैठक में बिहार ने तेलंगाना की पाम ऑयल खेती  में विशेष रुचि दिखाई. राज्य सरकार वहां किसानों को मिलने वाले प्रोत्साहन, गुणवत्तापूर्ण नर्सरी, माइक्रो इरिगेशन व्यवस्था और प्रोसेसिंग मिलों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगी. कृषि विभाग के अनुसार बिहार के उपयुक्त क्षेत्रों में ऑयल पाम की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा. इसके लिए कृषि अधिकारियों और किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल तेलंगाना भेजने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि वहां की सफल खेती प्रणाली को नजदीक से समझा जा सके.

तेलंगाना ने मांगा बिहार का मखाना मॉडल

दूसरी ओर तेलंगाना ने बिहार की पहचान बन चुके मखाना क्षेत्र  में गहरी दिलचस्पी दिखाई है. राज्य ने मखाना उत्पादन, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की पूरी श्रृंखला का अध्ययन करने की इच्छा जताई है. कृषि विभाग, बिहार सरकार का कहना है कि राज्य ने मखाना के साथ-साथ फल, सब्जी और मोटे अनाज के लिए क्लस्टर आधारित कृषि मॉडल विकसित किया है. इससे किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर सुविधाएं और संगठित विपणन का लाभ मिल रहा है.

3.1 लाख एकड़ में फैली है तेलंगाना की ऑयल पाम खेती

तेलंगाना देश में ऑयल पाम उत्पादन को तेजी से बढ़ाने वाले राज्यों में शामिल है. वर्ष 2025-26 में वहां लगभग 3.1 लाख एकड़ क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती की गई और करीब 74 हजार मीट्रिक टन क्रूड पाम ऑयल का उत्पादन  हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई, पौध सामग्री और प्रसंस्करण ढांचे के कारण तेलंगाना का मॉडल अन्य राज्यों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. यही अनुभव अब बिहार अपने कृषि विस्तार कार्यक्रमों में शामिल करने की योजना बना रहा है.

तकनीक और फसल विविधीकरण से किसानों को मिलेगा लाभ

कृषि विभाग के अनुसार दोनों राज्यों के बीच यह सहयोग केवल दो फसलों तक सीमित  नहीं रहेगा. भविष्य में कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई, प्रसंस्करण इकाइयों और बाजार आधारित खेती पर भी संयुक्त कार्य किया जाएगा. इस पहल से बिहार के किसानों को नई नकदी फसलों के विकल्प मिल सकते हैं, जबकि तेलंगाना मखाना जैसी उच्च मूल्य वाली फसल के सफल मॉडल से लाभ उठा सकेगा. दोनों राज्यों के बीच ज्ञान और तकनीक का यह आदान-प्रदान कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

Published: 14 Aug, 2026 | 08:44 PM

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