काली मिर्च के भाव ने लगाई छलांग! 724 रुपये किलो पहुंची कीमत, त्योहारों से पहले बढ़ी महंगाई

त्योहारी सीजन से पहले काली मिर्च की कीमतों ने जोरदार उछाल मारा है. घरेलू बाजार में साफ काली मिर्च 724 रुपये किलो तक पहुंच गई है. उत्पादन घटने से आयात बढ़ रहा है. श्रीलंका के बाद वियतनाम और ब्राजील से भी सस्ती काली मिर्च आने की संभावना है.

नोएडा | Updated On: 11 Sep, 2026 | 11:40 AM

Black Pepper Price: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में काली मिर्च की मांग तेजी से बढ़ गई है. बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन में कमी के चलते काली मिर्च के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. घरेलू बाजार में साफ की गई काली मिर्च का भाव 724 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. मांग पूरी करने के लिए व्यापारियों को आयात का सहारा लेना पड़ रहा है. श्रीलंका से काली मिर्च की आवक भी बढ़ी है.

घरेलू बाजार में 724 रुपये किलो तक पहुंचा भाव

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारियों के अनुसार, घरेलू बाजार में बिना साफ  की गई (अनगार्बल्ड) काली मिर्च का भाव करीब 704 रुपये प्रति किलो और साफ की गई (गार्बल्ड) काली मिर्च का भाव 724 रुपये प्रति किलो चल रहा है. गुरुवार को बाजार में करीब 50 टन काली मिर्च की आवक हुई, जिसमें ज्यादातर माल श्रीलंका से आयात किया गया था. इस साल श्रीलंका में काली मिर्च का उत्पादन अच्छा रहने से भारत में वहां से आपूर्ति बढ़ी है. हालांकि, श्रीलंकाई मुद्रा में उतार-चढ़ाव और बढ़ती खरीदारी के कारण आयातित काली मिर्च के दाम भी बढ़े हैं.

खराब मौसम और अल नीनो से उत्पादन पर असर

मसाला बाजार के जानकारों के मुताबिक, तमिलनाडु, कर्नाटक और इडुक्की जैसे प्रमुख काली मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में अपर्याप्त बारिश और खराब मौसम ने फसल को प्रभावित किया है. 2026 के फसल सीजन में भारत में काली मिर्च  का उत्पादन 65,000 से 75,000 टन रहने का अनुमान लगाया गया था. लेकिन ‘अल नीनो’ के प्रभाव के कारण वास्तविक उत्पादन अनुमान से काफी कम रहने की आशंका है. ऐसे में घरेलू खपत पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है.

वियतनाम और ब्राजील से भी बढ़ सकता है आयात

बिजनेसलाइन के अनुसार, भारत में काली मिर्च का अंतरराष्ट्रीय भाव  करीब 7,800 डॉलर प्रति टन है, जबकि श्रीलंका में यह करीब 6,900 डॉलर प्रति टन है. किशोर शामजी के अनुसार, अगर गणेश चतुर्थी से नवरात्रि और दिवाली तक मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो वियतनाम और ब्राजील की काली मिर्च भी भारतीय बाजार में जगह बना सकती है. वियतनाम में भाव करीब 6,000 डॉलर और ब्राजील में करीब 5,800 डॉलर प्रति टन है, जिससे दोनों देश भारत के लिए सस्ता विकल्प बन सकते हैं.

काली मिर्च छोड़ इलायची की खेती की ओर किसान

इडुक्की में कई किसान अब काली मिर्च की खेती छोड़कर  इलायची की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. किशोर शामजी के मुताबिक, ग्वाटेमाला में इलायची की फसल खराब होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय इलायची की कीमतों में तेजी आई है. बढ़ते दामों का फायदा उठाने के लिए किसान काली मिर्च के बजाय इलायची की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे आने वाले समय में काली मिर्च के घरेलू उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

Published: 11 Sep, 2026 | 11:40 AM

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