कैलिफोर्निया स्टार्टअप का बड़ा दावा, खेतों के कचरे से बनेगा सस्ता और ग्रीन एविएशन फ्यूल, जानें

Dairy Farm Waste Jet Fuel: कैलिफोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे खेतों और डेयरी फार्म के कचरे (जैसे गोबर से बनने वाली बायोगैस) को सीधे विमान ईंधन (जेट फ्यूल) में बदला जा सकता है. इससे न सिर्फ सस्ता और साफ ईंधन मिल सकता है, बल्कि वातावरण में फैलने वाली हानिकारक गैसें भी कम हो सकती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 09:32 PM

California SAF Fuel Breakthrough: कैलिफोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी ने दावा किया है कि उसने खेती और डेयरी फार्म के कचरे से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने का एक सस्ता और आसान तरीका खोज लिया है. यह तकनीक आने वाले समय में एयरलाइंस के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करने में काफी मदद कर सकती है. कंपनी सर्क्युलेटरी फ्यूल्स (Circularity Fuels) का कहना है कि, उसने पहली बार सफलतापूर्वक कच्ची बायोगैस को सीधे विमान के ईंधन में बदलने की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली है.

गाय के गोबर से जेट फ्यूल तक का सफर

यह पायलट प्रोजेक्ट कैलिफोर्निया के माडेरा इलाके के एक डेयरी फार्म पर किया गया, जहां 5000 से ज्यादा गायें हैं. यहां गायों के गोबर से बायोगैस बनाई जाती है, जिसमें मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड होती है. पहले यह गैस या तो बेकार चली जाती थी या सीधे हवा में छोड़ दी जाती थी. लेकिन अब नई तकनीक की मदद से इसी गैस को सीधे जेट फ्यूल में बदल दिया गया है.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

कंपनी के मुताबिक इस पूरे सिस्टम में दो खास रिएक्टर काम करते हैं.

  • पहला रिएक्टर बायोगैस को बदलकर उसे ‘सिंथेसिस गैस’ में बदल देता है.
  • इसके बाद दूसरा रिएक्टर इसी गैस को प्रोसेस करके तरल हाइड्रोकार्बन बनाता है, जिससे आखिर में विमान का ईंधन तैयार होता है.

इस प्रक्रिया में 98 फीसदी से ज्यादा मीथेन और 90 फीसदी से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल हो जाता है. खास बात ये है कि इस तरह बना ईंधन मौजूदा जेट फ्यूल के साथ मिलाकर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.

सस्ता विकल्प बन सकता है SAF

आज दुनिया में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) की काफी कमी है और यह अभी कुल जरूरत का 1 फीसदी से भी कम ही पूरा कर पाता है. अभी जो SAF बनता है, वह ज्यादातर इस्तेमाल किए हुए कुकिंग ऑयल से तैयार होता है, लेकिन वह भी सीमित मात्रा में ही मिलता है. कंपनी का कहना है कि उनकी नई तकनीक से बनने वाले प्लांट, यूरोप में बनने वाले पुराने प्रोजेक्ट्स के मुकाबले करीब 5 गुना सस्ते होंगे. इससे आने वाले समय में विमान ईंधन की कीमत भी कम हो सकती है.

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि, यह हवा में जाने वाली मीथेन गैस को पकड़कर सीधे ईंधन में बदल देती है. मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड से भी ज्यादा गर्मी रोकने वाली गैस है. कंपनी के मुताबिक, यह नया फ्यूल कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है.

आगे की योजना और विस्तार

सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब कंपनी 2027 में अपना पहला कमर्शियल प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है. शुरुआत में इसका काम अमेरिका के डेयरी और खेती वाले इलाकों में होगा, लेकिन आगे चलकर इसे लैटिन अमेरिका और यूरोप तक भी ले जाने की योजना है.

अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल हो जाती है, तो आने वाले समय में हवाई सफर सिर्फ सस्ता ही नहीं बल्कि ज्यादा पर्यावरण के लिए अच्छा भी हो सकता है. खेतों और डेयरी से निकलने वाला कचरा अब प्रदूषण की वजह नहीं, बल्कि ईंधन बनाने का एक नया और काम का तरीका बन सकता है.

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Published: 18 Jun, 2026 | 09:32 PM

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