हरियाणा-पंजाब में 2 रुपये किलो आलू, किसानों को नुकसान.. क्या 12 रुपये किलो MSP पर शुरू होगी खरीदी?

किसान नेता गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि पंजाब ही नहीं हरियाणा में भी आलू किसानों का बुरा हाल है. उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू का होलसेल रेट 2 रुपये किलो हो गया है. इसलिए किसानों को नुकसान से बचाने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार 12 रुपये किलो की दर से आलू की खरीद शुरू करे.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 20 Mar, 2026 | 01:58 PM

Potato Price Fall: पंजाब और हरियाणा में आलू की बंपर पैदावार ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. मार्केट में कीमतें इतनी अधिक गिर गई हैं कि किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. मंडियों में आलू का भाव गिरकर 2 से 4 रुपये किलो हो गया है. यानी किसान 200 से 400 रुपये क्विंटल आलू बेचने को मजबूर हो गए हैं. किसानों का कहना है कि मौजूदा रेट लागत से भी काफी कम है. यानी किसान घाटे में उपज बेच रहे हैं. दूसरी ओर यही आलू खुदरा बाजार में 15 से 20 रुपये किलो बिक रहा है. यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी आलू का ऑनलाइन रेट 20 रुपये किलो ही है. यानी खेती से उपभोक्ता तक आलू पहुंचते-पहुंचते पांच गुना महंगा हो गया. वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनिन मान के पूर्व हरियाणा प्रेसिडेंट गुणी प्रकाश का कहना है कि आलू किसानों को घाटे से उबारने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की तरह पंजाब और हरियाणा सरकार को भी 12 रुपये किलो की दर से आलू की सरकारी खरीद करनी चाहिए. दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों को  नुकसान से बचाने के लिए 9.50 रुपये किलो की दर से 12 लाख टन आलू खरीदने का ऐलान किया है.

गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि पंजाब ही नहीं हरियाणा में भी आलू किसानों का बुरा हाल है. उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू का होलसेल रेट 2 रुपये किलो हो गया है. इसलिए किसानों को नुकसान से बचाने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार 12 रुपये किलो की दर से आलू की खरीद शुरू करे. उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में किसान आधुनिक तरीके से आलू की खेती करते हैं. एक किलो आलू उगाने पर 10 रुपये की लागत आती है. ऐसे में अगर किसान 2 से 4 रुपये किलो दी दर से आलू बेचते हैं, तो उन्हें प्रति किलो 6 से 8 रुपये का नुकसान हो रहा है.

रिटेल मार्केट में 20 रुपये किलो आलू

गुणी प्रकाश ने कहा कि भले ही किसानों से 2 से 4 रुपये किलो की दर से आलू खरीदा जा रहा है, लेकिन रिटेल मार्केट  में पहुंचने के बाद यही आलू 15 से 20 रुपये किलो बिक रहा है. उनके मुताबिक, खेत से मंडी और मंडी से उपभोक्ता तक पहुंचते ही आलू की कीमत 13 से 16 रुपये किलो बढ़ जा रही है. उनका कहना है कि आम उपभोक्ता को आलू महंगा मिल रहा है, लेकिन किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा. बीच के मुनाफे व्यापारी और बिचौलिया खा जा रहे हैं. अगर बीच का मुनाफा किसानों को मिलता, तो उनकी कमाई में बढ़ोतरी होती.

व्यापारी और बिचौलिया खा रहे मुनाफा

एमएसपी कमेटी के सदस्य गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकार चाहती, तो आलू के रेट में इतनी गिरावट नहीं आती. उन्होंने कहा कि सरकारें व्यापारी और बिचौलिया को ज्यादा मुनाफा देने के लिए किसानों को नुकसान में डाल रही हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि आलू नगदी फसल है. इसकी शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है. ऐसे में अगर किसानों को अपनी उपज को कोल्ड स्टोरेज रखने की सुविधा मिलती, तो नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता. वे मार्केट रेट बढ़ने पर कोल्ट स्टोरेज से आलू निकाल कर समय पर बेच पाते.

कोल्ड स्टोरेज की हो व्यवस्था

गुणी प्रकाश ने कहा कि व्यापारी और सरकार की मिलीभगत के चलते कोल्ट स्टोरेज में जगह नहीं बची है. व्यापारी पहले ही सस्ते दर पर किसानों से आलू खरीदकर कोल्ड स्टोरेज में भंडारित कर दिए. ऐसे में कोल्ड स्टोरेज में जगह की कमी के चलते किसान अपनी उपज को भंडारित नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए सरकार को आलू किसानों को ध्यान में रखते हुए अलग से कोल्ट स्टोरेज की व्यवस्था करनी चाहिए.

 

 

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Published: 20 Mar, 2026 | 01:52 PM
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