खाद सब्सिडी भुगतान में डिजिटल क्रांति, केंद्र ने लॉन्च किया ई-बिल प्लेटफॉर्म…जानिए इसके फायदे

अब तक खाद सब्सिडी के बिल मैन्युअल तरीके से तैयार होते थे. फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक घूमती थीं, जिससे भुगतान में महीनों की देरी हो जाती थी. नए ई-बिल सिस्टम के लागू होने से यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है. अब बिलों की कोई फिजिकल मूवमेंट नहीं होगी और पूरा काम ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.

नई दिल्ली | Published: 2 Jan, 2026 | 08:01 AM

देश में खाद सब्सिडी व्यवस्था को पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब उर्वरक कंपनियों को कागजी फाइलों और दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. केंद्र सरकार ने करीब 2 लाख करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी के भुगतान को आसान और तेज बनाने के लिए एक इंटीग्रेटेड ई-बिल प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया है. इस नई व्यवस्था से खाद क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही देरी, जटिल प्रक्रिया और पारदर्शिता की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी.

कागजों से डिजिटल सिस्टम की ओर बड़ा बदलाव

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक खाद सब्सिडी के बिल मैन्युअल तरीके से तैयार होते थे. फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक घूमती थीं, जिससे भुगतान में महीनों की देरी हो जाती थी. नए ई-बिल सिस्टम के लागू होने से यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है. अब बिलों की कोई फिजिकल मूवमेंट नहीं होगी और पूरा काम ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा. इससे न सिर्फ समय बचेगा बल्कि मानवीय हस्तक्षेप भी कम होगा.

दो बड़े सिस्टम का एकीकरण बना आधार

यह ई-बिल प्लेटफॉर्म उर्वरक विभाग के इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) और वित्त मंत्रालय के पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) को जोड़कर तैयार किया गया है. इन दोनों प्रणालियों के एकीकरण से सरकार को खर्च पर रियल टाइम निगरानी मिलेगी और सभी भुगतान एक केंद्रीकृत सिस्टम में दर्ज होंगे. इससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाएगी.

पारदर्शिता और जवाबदेही होगी मजबूत

केंद्रीय उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस मौके पर कहा कि यह ऑनलाइन सिस्टम पारदर्शी और जवाबदेह शासन को मजबूत करेगा. अब हर लेनदेन का एक डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे बदला नहीं जा सकेगा. वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम एक सुरक्षित डिजिटल ऑडिट ट्रेल तैयार करता है, जिससे भविष्य में ऑडिट और निगरानी आसान होगी. सभी भुगतान और खर्च का विवरण एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा.

उर्वरक कंपनियों को बड़ी राहत

नई व्यवस्था से उर्वरक कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है. अब वे अपने सब्सिडी क्लेम ऑनलाइन जमा कर सकेंगी और भुगतान की स्थिति को रियल टाइम ट्रैक कर पाएंगी. इसके लिए उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे. जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग को संभव बनाता है, जिससे साप्ताहिक खाद सब्सिडी भुगतान समय पर जारी हो सकेगा.

फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट नियम से होगी समानता

ई-बिल प्लेटफॉर्म में एक मानक इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो तय किया गया है. इसमें फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट के सिद्धांत पर बिलों का निपटारा होगा, यानी जो बिल पहले आएगा, उसका भुगतान पहले किया जाएगा. इससे कंपनियों के बीच भेदभाव की शिकायतें भी खत्म होंगी और वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होगा.

धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम

इस नए सिस्टम में कई मजबूत तकनीकी सुरक्षा फीचर जोड़े गए हैं. भुगतान से पहले तय मानकों के आधार पर बिलों का सत्यापन होगा. हर एक कार्रवाई सिस्टम में लॉग होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या धोखाधड़ी को तुरंत पकड़ा जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे खाद सब्सिडी व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा.

किसानों तक समय पर पहुंचेगा लाभ

ई-बिल प्लेटफॉर्म का अप्रत्यक्ष फायदा किसानों को भी मिलेगा. जब उर्वरक कंपनियों को समय पर सब्सिडी मिलेगी, तो बाजार में खाद की उपलब्धता बनी रहेगी और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. कुल मिलाकर यह डिजिटल पहल न केवल सरकारी वित्तीय व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि खेती और किसान दोनों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद सिस्टम तैयार करेगी.

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